सहारनपुर

स्मार्ट सिटी के रेलवे स्टेशन पार्किंग माफिया बेलगाम, केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव से जांच की मांग

ठेकेदार द्वारा प्रतिमाह लाखों रुपये की अवैध उगाही की खबरें

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद सहारनपुर रेलवे स्टेशन के कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश पर पुराने रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण कार्य तेजी से चल रहा है और आम जनता की सुविधा के लिए स्टेशन परिसर व आसपास नई सड़कों का निर्माण भी कराया गया है।

लेकिन इन विकास कार्यों पर अब अवैध पार्किंग और वसूली का साया मंडराने लगा है। आरोप है कि रेलवे द्वारा आमजन के आवागमन के लिए बनाई गई नई सड़कों को अवैध रूप से पार्किंग में बदल दिया गया है। इन सड़कों पर ई-रिक्शा, टेंपो और टैक्सियों को खड़ा कर सवारियां भरने की अनुमति दी जा रही है और उनसे भी अवैध वसूली की जा रही है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

सहारनपुर रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस अड्डे के सामने स्थित पार्किंग ठेकों को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार स्टेशन परिसर और आसपास की पूरी पार्किंग व्यवस्था एक ही ठेकेदार के नियंत्रण में है, जहां नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है।

आरोप है कि रेलवे स्टेशन की लॉबी में टेंपो खड़ा करने के लिए चालकों से प्रतिमाह लगभग एक हजार रुपये, टैक्सियों को लॉबी में खड़ा करने के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह तथा ई-रिक्शा चालकों से भी एक हजार रुपये प्रतिमाह वसूले जा रहे हैं। इस वसूली के बदले किसी प्रकार की रसीद नहीं दी जाती, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि कार पार्किंग के नाम पर सौ रुपये वसूले जाते हैं, जबकि रसीद मात्र पचास रुपये की दी जाती है। मोटरसाइकिल और स्कूटर पार्किंग को लेकर भी इसी तरह की अनियमितताओं की बात कही जा रही है। आरोप है कि यह रकम   ठेकेदार के लोग वसूलते हैं, जिसने स्टेशन के आसपास कई युवक तैनात कर रखे हैं। तय शुदा रकम न देने पर चालकों को स्टेशन परिसर में सवारी उठाने से रोका जाता है। परंतु जीआरपी पुलिस मूक दर्शक बने हए हैं । 

 

रोडवेज बस अड्डे के सामने भी यही हाल बताया जा रहा है, जहां फल-फ्रूट चाट की ठेलियों को पांच सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से खड़ा कराया जा रहा है, जबकि यह व्यवस्था नियमों के विरुद्ध बताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पार्किंग, ठेली स्टैंड और नई सड़कों पर अवैध कब्जे के नाम पर प्रतिमाह लाखों रुपये की अवैध उगाही की जा रही है।

इस पूरे मामले को लेकर वाहन चालकों, यात्रियों और स्थानीय नागरिकों ने केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव से स्वयं इस प्रकरण पर ध्यान देने और रेलवे के उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही डीआरएम अंबाला डिवीजन, रेलवे प्रशासन, नगर निगम, नगर आयुक्त और महापौर से भी त्वरित संज्ञान लेकर कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो स्मार्ट सिटी सहारनपुर में किए जा रहे विकास कार्यों की छवि धूमिल हो सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रेलवे के बड़े अधिकारी और नगर निगम प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक जांच कर ठोस कार्रवाई करते हैं।

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