सहारनपुर

नकुड़ में नगर पालिका का विचित्र कारनामा, टेंडर खुलने से पहले ही शुरू हो गया 16 लाख का निर्माण कार्य

शहरी चौपाल ब्यूरो 

नकुड़ (सहारनपुर)। नगर पालिका नकुड़ में टेंडर प्रक्रिया को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आरोप है कि अवस्थापना निधि से करीब 16 लाख रुपये की लागत से दीवार निर्माण का कार्य टेंडर खुलने से पहले ही शुरू करा दिया गया है। यह निर्माण मलकपुर रोड स्थित खाली भूमि पर किया जा रहा है, जिसे भविष्य में रोडवेज बस स्टैंड के लिए प्रस्तावित बताया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस कार्य के लिए टेंडर अभी डाला भी नहीं गया और जिसकी टेंडर खोलने की तिथि 27 जनवरी निर्धारित है, उस पर पहले से ही ठेकेदार द्वारा निर्माण कराया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से इस निर्माण कार्य को बस स्टैंड निर्माण बताकर प्रचारित किया जा रहा है और सोशल मीडिया पर पालिका अध्यक्ष एवं उनके करीबी लोगों द्वारा फोटो डालकर वाहवाही लूटी जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि फिलहाल केवल दीवार और वाल पुट्ठी का कार्य कराया जा रहा है, जिसका टेंडर करीब 16 लाख रुपये का बताया जा रहा है। टेंडर दस्तावेज में भी साफ तौर पर मलकपुर रोड स्थित खाली भूमि पर दीवार निर्माण का ही उल्लेख है।

गौरतलब है कि मलकपुर रोड की यह भूमि पूर्व में केएलजीएम इंटर कॉलेज से जुड़ी एक विवादित जमीन थी, जो बाद में समझौते के आधार पर कॉलेज को मिल गई थी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन द्वारा नगर पालिका को रोडवेज बस स्टैंड निर्माण के लिए मात्र 1000 रुपये प्रतिमाह पर करीब 4000 वर्ग गज भूमि का अनुबंध किया गया था। यह अनुबंध 30 सितंबर 2024 को कॉलेज प्रबंधक सरस कुमार गोयल द्वारा पालिका अध्यक्ष शिव कुमार गुप्ता के नाम किया गया था। उस समय भी यह मामला चर्चा में रहा था कि पालिका से संबंधित किसी भी प्रकार का अनुबंध संयुक्त रूप से अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के नाम होना चाहिए, लेकिन यह अनुबंध केवल चेयरमैन के नाम ही किया गया।

अब उसी भूमि को घेरने के लिए अवस्थापना निधि से दीवार निर्माण का कार्य शुरू करा दिया गया है, जबकि टेंडर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना टेंडर खुले किस ठेकेदार को यह कार्य सौंपा गया है और किस वर्क ऑर्डर के तहत निर्माण कराया जा रहा है। इससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जब इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर विजय प्रताप सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने जानबूझकर अनजान बनते हुए कहा कि वह लखनऊ में हैं और उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। वहीं अवर अभियंता आशीष कुमार ने भी यही कहा कि उन्हें इस निर्माण कार्य की कोई जानकारी नहीं है। अधिकारियों के इस रवैये से यह साफ जाहिर होता है कि पूरे मामले में जिम्मेदार लोग जानबूझकर चुप्पी साधे हुए हैं।

नगर में चर्चा है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो टेंडर से पहले निर्माण कार्य शुरू कराने में पालिका प्रशासन और ठेकेदारों की सांठगांठ उजागर हो सकती है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करता है।

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