मिशन शक्ति–एंटी रोमियो अभियान में कैफे के केबिनों पर उठे सवाल, पुलिस कार्रवाई की भूमिका भी संदेह के घेरे में



शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। मिशन शक्ति एवं एंटी रोमियो अभियान के तहत थाना सदर बाजार क्षेत्र में की गई पुलिस कार्रवाई के दौरान शहर में संचालित कुछ कैफे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला थाना प्रभारी निरीक्षक कुसुम भाटी के निर्देशन में ओजपुरा पुलिया स्थित देसी पॉप कैफे एंड रेस्टोरेंट और न्यू कॉफी शॉप पर पहुंची महिला पुलिस टीम को मौके पर ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पुलिस की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
पर्दों वाले केबिनों ने बढ़ाई चिंता
पुलिस टीम जब आमने-सामने स्थित इन दोनों कैफे में पहुंची तो भीतर छोटे-छोटे केबिन बने हुए मिले, जिनके आगे पर्दे लगे थे। इन केबिनों में लड़के-लड़कियां बैठे पाए गए, जिनमें नाबालिग लड़कियां और कम उम्र के लड़के भी शामिल बताए जा रहे हैं। केबिनों की बनावट और पर्दों की व्यवस्था ने पूरे माहौल को संदिग्ध बना दिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिला थाना प्रभारी ने थाना सदर बाजार पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद स्थानीय पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की गाड़ियां भी मौके पर पहुंचीं।
मीडिया को रोके जाने पर भी उठे सवाल
कार्रवाई के दौरान जब मीडिया मौके पर पहुंची तो पुलिस द्वारा पत्रकारों को फोटो व वीडियो बनाने से रोका गया और उन्हें कैफे से बाहर करने का प्रयास किया गया। इससे पुलिस की कार्यशैली और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए।
महिला थाना प्रभारी कुसुम भाटी ने बताया कि पुलिस टीम यहां केवल मिशन शक्ति और एंटी रोमियो अभियान के तहत पंपलेट वितरण के लिए आई थी। वहीं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के इंस्पेक्टर सतेंद्र नागर ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और मीडिया से जांच में बाधा न डालने की अपील की। कुछ देर बाद पुलिस टीम बिना किसी स्पष्ट कार्रवाई के मौके से रवाना हो गई।
“सिर्फ मोमो-चाउमीन खाने की बात”, लेकिन सवाल बरकरार
पुलिस की ओर से कहा गया कि कैफे में मौजूद युवक-युवतियां केवल मोमो और चाउमीन खा रहे थे, किसी प्रकार की अश्लील गतिविधि या आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली। हालांकि स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि असली सवाल यह नहीं है कि कोई आपत्तिजनक हरकत मिली या नहीं, बल्कि यह है कि आखिर कैफे के भीतर पर्दों वाले केबिन क्यों बनाए गए हैं।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन कैफे में लड़का-लड़की, चाहे बालिग हों या नाबालिग, उनसे ₹200 प्रति घंटे के हिसाब से केबिन में बैठने का शुल्क लिया जाता है, जबकि खाने-पीने का बिल अलग से लिया जाता है। लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्र का माहौल बिगड़ रहा है और स्कूल व ट्यूशन जाने वाले बच्चे यहां घंटों समय बिता रहे हैं।
लाइसेंस और सुरक्षा मानकों पर भी सवाल
पत्रकारों द्वारा अंदर निरीक्षण के दौरान फायर सेफ्टी उपकरण नजर नहीं आए, जबकि नियमों के अनुसार रेस्टोरेंट में फायर सुरक्षा यंत्र और सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य हैं। आरोप है कि केबिनों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर लापरवाही है। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इन कैफे संचालकों के पास फूड लाइसेंस, नगर निगम का लाइसेंस और फायर सेफ्टी की अनुमति है या नहीं।
शहर में दर्जनों ऐसे कैफे, गुप्त जांच की मांग
सूत्रों के अनुसार सहारनपुर शहर में इस तरह के दर्जनों कैफे संचालित हो रहे हैं, जो अब तक पुलिस की नजरों से ओझल बने हुए थे। इस कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर जारी सख्त निर्देशों का सही ढंग से पालन कर पा रही है या नहीं।
स्थानीय लोगों की मांग है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी किसी उच्च अधिकारी से इन कैफे की गुप्त जांच कराएं, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। जनता का कहना है कि जो कैफे महानगर के युवाओं और युवतियों को गलत राह पर ले जा रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शहर का सामाजिक माहौल सुरक्षित और स्वस्थ बना रह सके।







