नानौता की जामा मस्जिद में नातिया मुशायरा आयोजित, शायरों के कलाम से गूंजा माहौल
शायरों नें हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा कि शान मेँ पेश किये एक से बढ़ कर एक कलाम


फैय्याज अली आब्दी
नानौता। कस्बे के मोहल्ला शेखजादगान स्थित जामा मस्जिद में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में तकरीरें हुईं और शायरों ने अपने-अपने नातिया कलाम पेश कर महफिल को रूहानियत से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मौलवी जुहैब सल्लामहू द्वारा तिलावते कलाम-ए-पाक से की गई। इसके बाद सहारनपुर के मजाहिरुल उलूम से आए उस्ताद कारी सलाउद्दीन ने कलाम-ए-पाक की फजीलत पर रोशनी डालते हुए लोगों से बुजुर्ग उलेमा की सोहबत में बैठने और अधिक से अधिक तिलावत करने की ताकीद की। कारी सलाउद्दीन द्वारा अरबी भाषा में खूबसूरत अंदाज में पेश की गई नात को सुनकर श्रोताओं ने जमकर दाद दी।
मौलाना आसिफ ने अपने कलाम में पढ़ा—
“जब हुस्न था उनका जलवा नुमा, अनवार का आलम क्या होगा,
हर कोई फिदा है बिन देखे, दीदार का आलम क्या होगा।”
वहीं मास्टर नूर ने इस अंदाज में नात पेश की—
“नूर है मोहम्मद का चांद और तारों में,
और झलक उन्हीं की है इन हंसी नजारों में।”
कारी मारूफ ने अपने कलाम में कहा—
“बख्शिश का तुम मोमिनो सामान कर चलो,
यौमे जज़ा की मुश्किलें आसान कर चलो।”
मुशायरे में उस वक्त खास जोश देखने को मिला जब कस्बे के मशहूर शायर शौक आब्दी नानौतवी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा—
“ख्याले दीदे मदीना जहन नशीन हुआ,
बदन में रूह खुदा की कसम मचलने लगी।”
इसके बाद कारी तैय्यब ने नात पेश कर बारगाहे रिसालत में अपनी अकीदत यूं पेश की—
“नबी-ए-अकरम शफी-ए-आज़म, दुखे दिलों का पयाम ले लो,
तमाम दुनिया के हम सताए खड़े हैं, सलाम ले लो।”
कार्यक्रम में उत्तराखंड के मंगलौर से आए आलमी शोहरतयाफ्ता शायर अफजल मंगलौरी ने भी अपने कलाम से समां बांध दिया—
“वहां हाजिरी हुई है मेरी वहां फिर से अफजल,
मिला जिनकी निस्बतों से शहे अंबिया का दामन।”
मुशायरे में मेहमान-ए-खुसूसी के रूप में शामिल कारी एहसान मोहसिन ने “वो मेरा नबी है, वो मेरा नबी है, जिस ज़ात का कुरआन में ज़िक्र-ए-जली है” पढ़कर श्रोताओं से खूब दाद बटोरी।
नातिया मुशायरे की निजामत कार्यक्रम संयोजक मौलाना ओसामा सिद्दीकी ने की, जबकि अध्यक्षता मुख्य अतिथि कारी एहसान मोहसिन ने की। कार्यक्रम में डॉ. उसेद सिद्दीकी, मौलाना अब्दुल्लाह राही देवबंदी, मौलाना जुहैर अहमद, कारी आरिफ, हाफिज मसूद अहमद, हाफिज अनीस अंसारी, हाजी शमीम मंसूरी, दिलशाद राणा सहित सैकड़ों की संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।







