सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी जन्मोत्सव पर उमड़ा आस्था का सैलाब
56 भोग, 36 व्यंजन अर्पित, लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ से प्रशासन हुआ सतर्क


शहरी चौपाल ब्यूरो
बेहट। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विश्व विख्यात सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी मंदिर में पौष मास की पूर्णिमा के अवसर पर मां शाकंभरी जयंती श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। शिवालिक पर्वतमाला के बीच स्थित इस पावन सिद्धपीठ में शनिवार को मां के जन्मोत्सव पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। भीड़ के चलते मंदिर परिसर से लेकर आसपास के क्षेत्रों तक भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पुलिस और प्रशासन को व्यवस्था संभालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
शंकराचार्य आश्रम में चल रहे शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद आदिशक्ति जगत जननी अपराजिता मां शाकंभरी देवी को 56 भोग एवं 36 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए गए। मां के भव्य श्रृंगार और दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। माता के जयकारों से संपूर्ण शिवालिक घाटी भक्तिमय वातावरण में डूब गई।
जयंती उत्सव के अवसर पर मंदिर एवं आश्रम को आकर्षक रूप से सजाया गया था। राणा परिवार की ओर से विशेष पूजा-अर्चना, विशाल भंडारा एवं रात्रि में भव्य जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालु देर रात तक मां के भजनों पर झूमते रहे। संतों ने अपने प्रवचनों में मां शाकंभरी देवी के अवतरण की कथा बताते हुए कहा कि मां अपने भक्तों के सभी कष्ट हर लेती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
मां शाकंभरी देवी मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। जन्मोत्सव के अवसर पर हुए इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर मां शाकंभरी देवी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाया।







