नगर पालिका की नीलामी पर सवाल, चहेतों को कौड़ियों के दाम सौंपी बेशकीमती संपत्ति
सर्किल रेट 53 लाख, पालिका को मिले मात्र साढ़े तीन लाख रुपये


शहरी चौपाल ब्यूरो
नकुड़ (सहारनपुर)। नगर पालिका परिषद नकुड़ पर बेशकीमती सार्वजनिक संपत्तियों की नीलामी में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। आरोप है कि पालिका चेयरमैन ने अधिकारियों से सांठगांठ कर करोड़ों की संपत्तियां अपने चहेते लोगों को नाममात्र की रकम पर नीलाम कर दीं, जिससे पालिका को भारी राजस्व हानि हुई है।
कस्बा निवासी समाजसेवी मनोज कुमार ने बताया कि 17 नवंबर को नगर पालिका द्वारा गुपचुप तरीके से नीलामी कराई गई, जिसमें तहसील कार्यालय के पास स्थित 100 फीट मेन बाजार की एक दुकान, जिसकी सर्किल रेट लगभग 10 लाख रुपये है, उसे मात्र 2 लाख 16 हजार रुपये में एक चहेते व्यक्ति को दे दी गई।
इतना ही नहीं, ब्लॉक कार्यालय के पास स्थित 57.58 मीटर के एक भूखंड, जिसकी सर्किल रेट के अनुसार कीमत लगभग 43.50 लाख रुपये बैठती है, उसे पालिका चेयरमैन के सगे बहनोई, गांव निवासी बिजेंद्र कुमार के नाम मात्र 1 लाख 17 हजार रुपये में नीलाम कर दिया गया। इस भूखंड का किराया भी केवल 1000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया।
समाजसेवी मनोज कुमार का आरोप है कि दोनों ही संपत्तियों का कुल सर्किल रेट लगभग 53 लाख रुपये है, जबकि नगर पालिका को इस पूरी नीलामी से मात्र साढ़े तीन लाख रुपये की ही प्राप्ति हुई। आरोप यह भी है कि दोनों संपत्तियों का अनुबंध पालिका के एक बाबू से कराया गया तथा नीलामी प्रक्रिया में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-सी संपत्ति किस वर्ग के लिए आरक्षित थी, जिससे आरक्षण व्यवस्था को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि नीलामी के दिन से ही उन्होंने पालिका ईओ, नायब तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम और अपर आयुक्त सहित कई अधिकारियों को नियमविरुद्ध नीलामी की सूचना दी, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते किसी भी अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की। आज तक न तो फाइल तलब की गई और न ही किसी प्रकार की जांच शुरू हुई।
मनोज कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई और अवैध नीलामी को निरस्त नहीं किया गया तो वह इस मामले को हाईकोर्ट और लोकायुक्त तक ले जाएंगे।
इस संबंध में जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि उन्हें 24 दिसंबर को शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने अपर जिलाधिकारी प्रशासन को पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तलब करने के निर्देश दिए हैं। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







