एससी/एसटी एक्ट मामले में आरोपी ओमबीर की जमानत याचिका खारिज


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम मो. अहमद खान की अदालत ने थाना नकुड़ क्षेत्र के एक गंभीर मामले में आरोपी ओमबीर की प्रथम नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने आरोपी के आचरण को न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाला बताते हुए उसे जिला कारागार भेजने के आदेश दिए हैं।
विशेष सत्र परीक्षण संख्या 156/2019 के अंतर्गत आरोपी ओमबीर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 504, 506 एवं एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1) के तहत मुकदमा दर्ज है। मामला ग्राम तिगरी रामगढ़ थाना नकुड़ से संबंधित है, जिसमें वादी ऋषिपाल ने जातिसूचक गाली, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत अभियोजन कथन के अनुसार, वादी अनुसूचित जाति से संबंधित है और आरोपी द्वारा लंबे समय से उसकी भूमि पर ईंट भट्ठा संचालन के दौरान बकाया धनराशि को लेकर विवाद चला आ रहा था। आरोप है कि इसी विवाद के चलते आरोपी ने अपने सह अभियुक्त के साथ मिलकर वादी के साथ मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
जमानत पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे गांव की रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है और मामले में कोई स्वतंत्र साक्ष्य या चिकित्सीय प्रमाण मौजूद नहीं है। वहीं विशेष लोक अभियोजक और वादी पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए बताया कि आरोपी ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद समय पर आत्मसमर्पण नहीं किया और लंबे समय तक न्यायालय से बचता रहा।
अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि आरोपी के विरुद्ध पूर्व में कई बार जमानती और गैर-जमानती वारंट जारी किए गए, लेकिन उसने जानबूझकर न्यायालय के समक्ष उपस्थिति नहीं दी। साथ ही माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा 28 मार्च 2024 को दिए गए स्पष्ट आदेश की भी अवहेलना की गई।
इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने कहा कि आरोपी को जमानत देने के लिए कोई पर्याप्त आधार नहीं है। परिणामस्वरूप अदालत ने आरोपी ओमबीर की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेजने के आदेश दिए।
यह आदेश 08 दिसंबर 2025 को पारित किया गया।







