फल पट्टी क्षेत्र में प्रतिबंधित हरे भरे पेड़ों पर विभाग से बिना अनुमति लिए जोर-शोर से चल रहा कुल्हाड़ा


रिपोर्ट, सोम पाल कश्यप
बेहट , क्षेत्र में फल पट्टी होने के बावजूद वन तस्करों की पैनी नजर है फल पट्टी क्षेत्र में प्रतिबंधित हरे भरे पेड़ों पर विभाग से बिना अनुमति लिए कुल्हड़ा चल रहा है सामाजिक वानिकी क्षेत्र के अंतर्गत गांव कादरपुर के पास बिना अनुमति के प्रतिबंधित प्रजाति के सागौन दर्जनों पेड़ो को वन तस्करों द्वारा काट लिए गए है।इस मामले में विभाग की भूमिका भी संदिग्ध लग रही है। मामले की वन विभाग के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने पर विभाग में हड़कंम मचा हुआ है।
जहां एक ओर प्रदेश सरकार स्वच्छ वायु एवं स्वच्छ पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिय करोड़ो रु खर्च कर के वृक्षारोपण करने में लगे हुए है वहीं दूसरी और क्षेत्र में प्रतिबंधित हरे भरे पेड़ो पर ठेकेदार बैखौफ होकर दिन रात कुल्हड़ा चलाकर सरकार को लाखों रु की राजस्व हानि पहुंचा रहे है । चर्चा है कि विभाग के भी कुछ कर्मचारियों का इन लकड़ी ठेकेदारों का संरक्षण प्राप्त है वन माफिया बिना अनुमति लिय ही प्रतिबंधित आम सागवान शीशम आदि प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ो को काट रहे हैं जिस से सरकार को विभाग के ही कुछ कर्मचारी लकड़ी माफियाओं को से मिलकर लाखों रु की राजस्व हानि पहुंचा रहे है। ऐसी परिस्थितियों में सरकार द्वारा वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का भी मजाक उड़ाया जा रहा है। सामाजिक वानिकी बेहट रेंज के अंतर्गत कस्बे से कादरपुर रोड पर स्थित एक खेत में खड़े दर्जनों से सागवान के पेड़ एक व वन तस्करों द्वारा काट लिए गए है जिस से सरकार को लाखों रु की राजस्व हानि पहुंचाई गई है। अगर कोई संभ्रांत व्यक्ति रेंज में आकर शिकायत करता है तो स्थानीय कर्मचारी कार्यवाही के नाम पर लकड़ी तस्करो से कार्यवाही के नाम पर लीपा पोती करते है। प्रतिबंधित पेड़ो के काटे जाने की सूचना पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तब तक वन तस्करों ने काटी गई लकड़ी को मौके से उठाकर ठिकाने लगा दी गई थी।
इस संबंध में सामाजिक वानिकी एस डी ओ संयोगिता चौहान से जानकारी की गई तो उन्होंने बताया कि सूचना पर वन विभाग के क्षेत्रीय वन दरोगा को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। जब क्षेत्रीय वन दरोगा विपिन कुमार से इस मामले में जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि वे मौके पर जांच के लिए गए थे। खेत मालिक को रेंज में आने के लिए कहा गया है। खेत मालिक या पेड़ो को काटने वाले ठेकेदार से जुर्माने के लिए केस काटा जायेगा यदि जुर्माना नहीं भरते तो मुकदमा दर्ज कराया जायेगा।अब देखना यह है कि विभाग इस मामले में कार्यवाही करता है ।







