ग्राम समाज की भूमि को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष, लाठी-डंडे और ईंट-पत्थर चले, 25 से अधिक घायल


शहरी चौपाल ब्यूरो
बेहट। कोतवाली बेहट क्षेत्र के गांव झींवरहेड़ी–पठानपुरा मुस्तकम में ग्राम समाज की भूमि को लेकर एक ही बिरादरी के दो पक्षों के बीच जबरदस्त संघर्ष हो गया। मामूली विवाद से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें लाठी-डंडे चले और ईंट-पत्थर बरसाए गए। इस घटना में महिलाओं सहित दोनों पक्षों के करीब 25 लोग घायल हो गए। गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव में स्थित सरकारी भूमि पर चारदीवारी बनी हुई है, जिसका उपयोग कश्यप समाज के लोग वर्षों से धार्मिक अनुष्ठान, शादी-विवाह एवं अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए करते आ रहे हैं। आरोप है कि कश्यप समाज के ही एक पक्ष द्वारा उक्त भूमि पर कब्जे की नीयत से निर्माण कार्य शुरू किया गया। जब इसकी जानकारी दूसरे पक्ष को हुई तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर विरोध किया। इसी को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसक संघर्ष में तब्दील हो गई।
झड़प के दौरान दोनों ओर से जमकर लाठी-डंडे चले और ईंट-पत्थर फेंके गए, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई। संघर्ष में दर्जन भर से अधिक महिलाएं और पुरुष घायल हो गए। सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सतपाल सिंह भाटी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लाठियां फटकारकर हालात को काबू में किया। घायलों को एंबुलेंस 108 और 102 की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेहट में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
गांव में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सतपाल सिंह भाटी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सागर जैन ने बताया कि कश्यप समाज के दो पक्षों के बीच विवाद हुआ है, जिसमें कुछ लोग घायल हुए हैं। घायलों को अस्पताल भेजा गया है और दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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पुलिस की लापरवाही बनी विवाद का कारण
बेहट। गांव झींवरहेड़ी में हुए इस खूनी संघर्ष के पीछे पुलिस और प्रशासनिक लापरवाही को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि दो दिन पूर्व भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसकी तहरीर पुलिस को दी गई थी और प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवगत कराया गया था। पुलिस द्वारा दो लोगों का मेडिकल कराए जाने की बात सामने आई है, लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते सख्त कदम उठाती, तो इतना बड़ा विवाद और हिंसा टाली जा सकती थी।







