जन्म–मृत्यु प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी उजागर, महापौर ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर नगर निगम में जन्म–मृत्यु प्रमाणपत्रों को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद महापौर डॉ. अजय कुमार ने शुक्रवार को जन्म–मृत्यु अनुभाग का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अभिलेखों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं, जिसके बाद महापौर ने संबंधित लिपिक सुरेन्द्र कुमार को तत्काल प्रभाव से विभाग से हटाने और पिछले छह वर्षों में जारी सभी जन्म–मृत्यु प्रमाणपत्रों की किसी स्वतंत्र संस्था से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण में महापौर के साथ अपर नगर आयुक्त द्वितीय श्री मृदुलंजय भी मौजूद रहे। कार्यालय में मौजूद लिपिक मुकेश कुमार, सुरेन्द्र कुमार, कंप्यूटर ऑपरेटर शिवानी और अंकित आर्य से महापौर ने अभिलेखों की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2025–26 की जन्म–मृत्यु पंजिका प्रमाणित नहीं थी, जबकि 2024–25 और 2025–26 की पंजिकाओं के कई पृष्ठों पर नंबरिंग तक नहीं की गई थी। कुछ पंजिकाओं के शुरुआती और अंतिम पृष्ठ खाली पाए गए, साथ ही प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित एकीकृत रजिस्टर भी कार्यालय में उपलब्ध नहीं था। मामले को और गंभीर तब माना गया जब यह पता चला कि कार्यालय से कुछ विशेष क्षेत्रों के 30 से 40 वर्ष पुराने जन्म प्रमाणपत्र तक जारी किए गए हैं। जब महापौर ने इन प्रमाणपत्रों के मूल अभिलेख मांगे, तो लिपिक सुरेन्द्र कुमार कोई भी रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सके और उन्होंने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने बताया कि पंजिकाएं संविदाकर्मी बिलाल और अन्य कर्मचारियों द्वारा तैयार की गई हैं, जबकि यह कार्य लिपिक की जिम्मेदारी है। महापौर ने इसे भारी लापरवाही और कार्य प्रणाली में गंभीर त्रुटि माना और स्पष्ट कहा कि इस प्रकार की अनियमितताएं नगर निगम की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। नागरिकों को समय पर प्रमाणपत्र न मिलने और अनावश्यक परेशानियां झेलने की शिकायतें भी महापौर के संज्ञान में आई हैं। महापौर ने नगर आयुक्त को निर्देश दिए हैं कि लिपिक सुरेन्द्र कुमार सहित संबंधित कर्मचारियों को संवेदनशील पदों से हटाकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जन्म–मृत्यु अभिलेखों की विश्वसनीयता बहाल हो सके और नागरिकों को बिना परेशानी प्रमाणपत्र उपलब्ध हो सकें। महापौर ने कहा कि जन्म–मृत्यु प्रमाणपत्र नागरिकता से सम्बंधित अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है और इसके निर्गम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।







