माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय का चतुर्थ स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया
रक्तदान, नवाचार मेले और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने किया कार्यक्रम को यादगार


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय का चतुर्थ स्थापना दिवस बड़े ही हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामयी वातावरण में मनाया गया। सुबह से ही विश्वविद्यालय परिसर में मंगल ध्वनियाँ गूंजती रहीं और पूरे दिन विविध कार्यक्रमों ने स्थापना दिवस को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत हवन-यज्ञ से हुई, जिसमें कुलपति मुख्य यजमान के रूप में शामिल रहीं। उनके साथ कुलसचिव कमल कृष्ण, परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार और उपकुलसचिव अनुप कुमार ने विश्वविद्यालय परिवार की उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए आहुतियाँ अर्पित कीं।
हवन के बाद महापौर डॉ. अजय कुमार ने रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रक्तदान मानवता की सेवा का सबसे बड़ा और पवित्र माध्यम है। विद्यार्थियों व स्टाफ ने उत्साहपूर्वक शिविर में भाग लिया, जिसमें 35 लोगों ने रक्तदान किया।
इसके बाद महापौर और जिलाधिकारी मनीष बंसल ने संयुक्त रूप से विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर पौधारोपण किया। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाने और हरित मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
दोपहर में जिलाधिकारी ने इनोवेशन मेले का शुभारम्भ करते हुए विभिन्न स्टार्टअप मॉडलों और वैज्ञानिक परियोजनाओं का अवलोकन किया। विद्यार्थियों के नवाचार और तकनीकी कौशल की उन्होंने सराहना की तथा उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
दोपहर बाद का सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थापना दिवस का मुख्य आकर्षण रहा। नगर आयुक्त शिपु गिरि और मुख्य विकास अधिकारी सुमित महाजन की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। स्पर्श दिव्यांग विद्यालय और नेत्रहीन विद्यालय के बच्चों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। इसके अलावा यज्ञ प्रस्तुति, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम, विकसित भारत थीम, नवदुर्गा प्रस्तुति और चार युगों पर आधारित मंचन ने समारोह को भव्यता प्रदान की।
कार्यक्रम के दौरान इंटरप्रेन्योरशिप और वर्क फ्रॉम होम जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की गई तथा कुल 11 एमओयू भी किए गए।
समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी और लगभग 600 लोग उपस्थित रहे। स्थापना दिवस कार्यक्रम समाजसेवा, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।







