सहारनपुर

भाजपा संगठन फिर निशाने पर — सहारनपुर में SIR मतदाता सर्वे से गायब पार्टी, विपक्ष मैदान में पूरी ताकत से सक्रिय

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर । केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा घर-घर चलाए जा रहे एस ई आर मतदाता सर्वे ने सहारनपुर भाजपा संगठन की कमजोरियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जिले के लगभग सभी बूथों से भाजपा पूरी तरह गायब दिखाई दे रही है, जबकि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता, पार्षद, विधायक और वरिष्ठ नेता जमीनी स्तर पर लगातार सक्रिय हैं।

सूत्रों के अनुसार भाजपा जिलाध्यक्ष से लेकर बूथ अध्यक्ष तक सर्वे को लेकर न तो गंभीर हैं और न ही संजीदगी दिखा रहे हैं। कई स्थानों पर स्वयं भाजपा नेताओं के बूथों पर भी एस ई आर सर्वे में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता अधिक सक्रिय पाए गए हैं।

भाजपा की उदासी — विपक्ष कर रहा मैदान पर कब्ज़ा

नगर निगम क्षेत्र में भाजपा के जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष की अनुपस्थिति सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वे को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच नहीं पहुंचे।

लोकसभा चुनाव के दौरान जिस लापरवाही का खामियाज़ा भाजपा को 60 हजार से अधिक वोटों की हार के रूप में भुगतना पड़ा था, वही तस्वीर अब दुबारा दिखाई देने लगी है। चुनाव के समय 150 से अधिक बूथों पर भाजपा एजेंट तक मौजूद नहीं थे, और अब सर्वे में भी यही उदासीनता हावी है।

विपक्षी पार्षद द्वारा SIR मतदाता सर्वे कराते हुए

विपक्षी पार्षद मंसूर बदर द्वारा मतदान सर्व करवाते हुए 

BLO भी विपक्ष की पकड़ में — भाजपा मतदाता उपेक्षित

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार जिले में तैनात अधिकांश बीएलओ समाजवादी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं, और कई जगह विपक्षी नेताओं के घरों में ही फर्जी या मनमाना सर्वे कराया जा रहा है। भाजपा के कोर मतदाताओं तक न तो बीएलओ पहुंच पा रहे हैं, न ही संगठन का कोई प्रतिनिधि।

जब इस पूरे मुद्दे पर संवाददाता ने भाजपा संगठन के मीडिया प्रभारी और नगर विधायक से बात की, तो उन्होंने कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी। उनकी ओर से केवल इतना कहा गया कि “हम रोजाना बैठक कर रहे हैं।”

जमीनी स्तर पर BJP ढहती दिख रही, विपक्ष कर रहा 12 बजे रात तक काम

सूत्र बताते हैं कि जिलाध्यक्ष सहित कई भाजपा नेता केवल बड़े नेताओं की परिक्रमा में व्यस्त रहते हैं। नतीजतन, संगठन का ढांचा निचले स्तर तक बिखर चुका है।

इसके उलट, समाजवादी पार्टी के पार्षद और कार्यकर्ता सुबह से लेकर रात 12 बजे तक घर-घर जा कर मतदाता सर्वे कर रहे हैं। सवाल उठता है—
क्या किसी भाजपा पार्षद ने ऐसा प्रयास किया? क्या किसी संगठन पदाधिकारी ने इसकी जिम्मेदारी ली?

सर्वे की धीमी गति और भाजपा की लगातार उदासीनता ने जिले की राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले चुनावों में भाजपा के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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