स्कार दीप परिवार ने मनाया अमर हुतात्मा भाई मतीदास छिब्बर का शहादत दिवस


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। संस्कार दीप परिवार के तत्वावधान में अमर हुतात्मा शहीदों के सरताज भाई मतीदास छिब्बर का शहादत दिवस श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम गोष्ठी के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें वक्ताओं ने भाई मतीदास, भाई सतीदास और भाई दयाला के अद्वितीय बलिदान को नमन किया। पटेल नगर स्थित मोहन सदन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए श्रीमती शोभना मोहन ने कहा कि भारत भूमि ऐसे महान वंशों की कर्मभूमि रही है जिन्होंने धर्म और देश की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि भाई मतीदास, सतीदास और दयाला ने धर्म और राष्ट्र की मर्यादा के लिए अपना जीवन अर्पित किया। एडवोकेट पोस्ट वार्डन अरुण सूरी ने बताया कि भाई मतीदास ने इस्लाम कबूल करने से इनकार करते हुए मृत्यु को स्वीकार किया। उनके इस बलिदान से प्रभावित होकर दसवीं पातशाही गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने उन्हें भाई की उपाधि से विभूषित किया था। व्यापारी नेता मुकेश दत्ता और समाजसेवी योगेश बाली ने कहा कि अपने लिए तो हर कोई जीता है, परंतु देश और कौम के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले वीर बहुत कम होते हैं। उन्होंने कहा कि हमें उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर समाज व राष्ट्र सेवा का संकल्प लेना चाहिए। समाजसेवी रवि बख्शी ने कहा कि भाई मतीदास छिब्बर, सतीदास और दयाला जी का त्याग एवं बलिदान सदियों तक स्मरणीय रहेगा। उन्होंने बताया कि 9 नवंबर 1675 को चांदनी चैक, दिल्ली में भाई मतीदास को लकड़ी के दो तख्तों के बीच बांधकर आरे से चीर दिया गया था। उनके भाई सतीदास जी को खौलते तेल से और दयाल जी को रुई में लपेटकर जीवित जलाया गया, यह अद्वितीय शहादत सदैव इतिहास में अमर रहेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता रविंद्र कुमार मोहन ने की तथा संचालन रवि बख्शी ने किया। कार्यक्रम में श्रीमती पूनम दत्ता, प्रीति बख्शी, परवीन चांदना, दिनेश दत्ता, विनोद मिगलानी एवं ललित दत्त सहित अन्य गणमान्य नागरिकों का विशेष सहयोग रहा।







