नर्सिंग होम्स में हिंसा: असुरक्षित दौर में सुरक्षित चिकित्सा की जरूरत
मौजूदा समय में चिकित्सा, सेवा के साथ-साथ चुनौती पूर्ण कार्य: डॉ नीरज पुलिस प्रशासन चिकित्सकों की सुरक्षा को तत्पर: सागर जैन


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन, सहारनपुर द्वारा नर्सिंग होम्स में हिंसा: असुरक्षित दौर में सुरक्षित चिकित्सा की जरूरत विषय पर एक अत्यंत उपयोगी एवं समसामयिक सीएमई का आयोजन किया गया। अम्बाला रोड़ स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मोहाली से पधारे देश के प्रतिष्ठित चिकित्सक एवं वैधानिक विशेषज्ञ डॉ. नीरज नागपाल ने चिकित्सकों ने कहा कि चिकित्सकों को संवाद, पारदर्शिता, दस्तावेजीकरण और पुलिस प्रशासन से समन्वय के माध्यम से हिंसा की घटनाओं से स्वयं को तथा अपने संस्थान को सुरक्षित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में चिकित्सा सेवा न केवल एक सेवा है बल्कि एक चुनौतीपूर्ण पेशा बन चुकी है, जिसमें सुरक्षा और विश्वास दोनों की आवश्यकता है। मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक सागर जैन ने कहा कि चिकित्सकों एवं पुलिस प्रशासन के बीच आपसी सहयोग और विश्वास को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। सहारनपुर पुलिस सदैव चिकित्सकों की सुरक्षा एवं सहयोग के लिए तत्पर रहेगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन, सहारनपुर की ओर से डॉ. नीरज नागपाल को राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सकीय-कानूनी क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान एवं डॉक्टरों के अधिकारों की रक्षा हेतु सक्रिय रूप से कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. परवीन शर्मा ने सभी चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम संयोजक मानद सचिव डॉ. सी. एम. कमाल ने कहा कि “नर्सिंग होम्स पर हिंसा की घटनाओं से दृढ़ता और सामूहिक रूप से निपटना होगा ताकि चिकित्सक-रोगी संबंधों में विश्वास बना रहे। कोषाध्यक्ष डॉ. रिकी चैधरी ने कार्यक्रम के आयोजन में पूर्ण सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम में डॉ. कलीम अहमद, डॉ. रजनीश दहूजा, डॉ. नरेश नोशरन, डॉ. अजय गुप्ता, डॉ. विजय चैधरी, डॉ. मनीष गर्ग, डॉ. विकास सिंघल, डॉ. रजनीश अग्रवाल, डॉ. स्नेह लता शर्मा, डॉ. अनुराधा गुप्ता, डॉ. राकेश जैन, डॉ. नवनीत अरोड़ा, डॉ. प्रवीण बंसल, डॉ. फहीम खान, डॉ. यासिर सिद्दीकी, डॉ. आलोक अग्रवाल, डॉ. राजीव सचदेवा, डॉ. नितिन मल्होत्रा, डॉ. ममता गर्ग, डॉ. भावना वर्मा, डॉ. गोपाल मेहता, डॉ. हरिओम गर्ग, डॉ. विवेक त्यागी आदि शामिल रहे।







