मनुष्य का भविष्य उसके कर्मों पर करता है निर्भर: आचार्य विमर्श सागर महाराज
जैन समाज का ऐतिहासिक क्षण आचार्य विमर्श सागर जी महाराज का संघ सहित विहार


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर के धार्मिक इतिहास में सोमवार का दिन अविस्मरणीय बन गया, जब आचार्य विमर्श सागर जी महाराज अपने 30 मुनिराजों और आर्यिका चतुर्विध संघ के साथ जैन बाग स्थित श्री मंदिर जी से विहार कर आवास विकास की ओर प्रस्थान किया। चार माह तक चले इस ऐतिहासिक चातुर्मास के उपरांत नगर के जैन समाज ने भावभीनी विदाई दी। जैन समाज अध्यक्ष राजेश कुमार जैन के आवास पर आचार्य श्री ने मंत्रोच्चारण और धार्मिक परंपराओं के मध्य कलश स्थापना कराई। इस पावन क्षण के साक्षी हजारों श्रावक-श्राविकाएं बने। उल्लेखनीय है कि चतुर्विध संघ ने 30 जून को सहारनपुर में मंगल प्रवेश किया था और तब से निरंतर धर्म की गंगा प्रवाहित करते हुए समाज को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर किया।आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य का भविष्य उसके कर्मों पर निर्भर करता है। हिंसा, झूठ, द्वेष, प्रतिशोध और नफरत से कोई उपलब्धि प्राप्त नहीं की जा सकती। सत्य, अहिंसा, जीव-दया, करुणा और क्षमा से ही हम आत्मकल्याण और समाज का हित कर सकते हैं। उन्होंने सहारनपुर की भूमि को पुण्यभूमि बताते हुए कहा कि यह नगर प्राचीनकाल से ही धर्मनगरी रहा है, जहाँ अनेक तपस्वियों और विद्वानों ने जन्म लेकर इस भूमि को गौरवान्वित किया है। धर्मसभा में समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने समाज की ओर से आचार्य श्री के चरणों में क्षमा याचना करते हुए बताया कि चातुर्मास काल में सहारनपुर वासियों ने अभूतपूर्व आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया है। उन्होंने घोषणा की कि जैन मंदिर परिसर में आचार्य विमर्श सागर सभागार का निर्माण कराया जाएगा। धर्मसभा में विधायक राजीव गुम्बर ने कहा कि जो समाज चींटी जैसे सूक्ष्म जीव की भी रक्षा करता है, वह निश्चय ही दया और करुणा से परिपूर्ण है। जैन समाज विश्वशांति और प्राणिमात्र के कल्याण का प्रतीक है। इस अवसर पर भाजपा महानगर के पूर्व अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के मुख्य संयोजक राकेश जैन ने वर्षायोग में महिलाओं व युवाओं के सहयोग की सराहना की और कहा कि आचार्य श्री का वात्सल्यपूर्ण आशीर्वाद सहारनपुर के लिए अमूल्य धरोहर रहेगा। विहार यात्रा के दौरान आचार्य श्री संघ जैन बाग, रायवाला, सराफा बाजार, घंटाघर, कोर्ट रोड होते हुए मिशन कंपाउंड स्थित अध्यक्ष राजेश कुमार जैन के आवास पर पहुंचे। यहां बैंड-बाजे और जयघोषों के बीच भव्य स्वागत किया गया। आचार्य श्री के करकमलों से राजेश कुमार जैन को कलश ग्रहण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इससे पूर्व संघ के सभी साधुओं और आर्यिकाओं ने संयम के उपकरण ‘पिच्छिका’ का परिवर्तन किया तथा पुरानी पिच्छिकाएं समाज के धार्मिक श्रावकों को प्रदान की गईं। इस सौभाग्य को प्राप्त करने वालों में मनोज जैन , सीए अनिल जैन, डॉ. सुशील जैन, राजीव जैन सर्राफ, संदीप जैन, नितिन जैन, संजीव जैन, पंकज जैन, वर्षित जैन आदि शामिल रहे।







