स्मार्ट प्रीपेड मीटर घोटाला: राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने लगाई सीबीआई जांच की मांग
ऊर्जा मंत्री को गुमराह कर रहा पॉवर कॉर्पोरेशन – परिषद अध्यक्ष


शहरी चौपाल ब्यूरो
लखनऊ। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के नाम पर बड़े घपले का आरोप लगाते हुए मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने शुक्रवार को कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना में उपभोक्ताओं पर जानबूझकर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
वर्मा ने बताया कि महाराष्ट्र में उपभोक्ताओं से सभी मॉड्यूल सहित मीटर की कीमत केवल 2610 रुपये ली जा रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह दर 6016 रुपये तय की गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा स्मार्ट मीटर योजना के लिए 18,885 करोड़ रुपये अनुमोदित किए गए थे, लेकिन प्रदेश में इसका टेंडर 27,342 करोड़ रुपये में किया गया। इस प्रकार लगभग 8500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च की गई है, जिसकी जांच सीबीआई या किसी अन्य उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के एक्स (X) पर किए गए उस पोस्ट पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें मंत्री ने कहा था कि वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने और पारदर्शिता लाने के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। इस पर वर्मा ने आरोप लगाया कि पॉवर कॉर्पोरेशन ऊर्जा मंत्री को गुमराह कर रहा है, जिसके चलते मंत्री को स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रकरण की पूरी जानकारी नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए इस मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।







