मुझे शर्म आ रही है… हट जाओ” कहकर हथकड़ी समेत भागा था नरेश, अब एनकाउंटर में ढेर — मिस्त्री से बना कुख्यात अपराधी


शहरी चौपाल ब्यूरो
फिरोजाबाद। दो करोड़ रुपये की लूट का मास्टरमाइंड और फरार अपराधी नरेश उर्फ पंकज आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। कभी बिजली मिस्त्री का काम सीखने वाला यह युवक गलत संगत में पड़कर अपराध की दुनिया में उतर गया था और अब उसका आपराधिक सफर पुलिस की एक गोली के साथ खत्म हो गया।
जानकारी के अनुसार, फिरोजाबाद की मक्खनपुर पुलिस की अभिरक्षा से बीते दिनों हथकड़ी समेत भागा नरेश मंगलवार को पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। नरेश ने पुलिस से कहा था — “मुझे शर्म आ रही है, हट जाओ, जब तक आप खड़े रहेंगे शौच नहीं कर पाऊंगा” — और इसी बहाने पुलिस को चकमा देकर खेतों में फरार हो गया था।
नरेश पर गुजरात की जीके कंपनी के कर्मचारियों से दो करोड़ रुपये की लूट का आरोप था। फरारी के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया था और उसकी तलाश में कई टीमें जुटी थीं।
मिस्त्री से बना अपराधी
अलीगढ़ के ग्राम अरनी, खैर निवासी नरेश कभी बिजली उपकरणों का मिस्त्री था। काम की तलाश में वह दिल्ली गया और वहीं गलत संगत में पड़कर अपराध की राह पकड़ ली। गाजियाबाद जेल में पहली बार बंद होने के बाद उसने अपना गैंग बनाया और लूट, तस्करी जैसी घटनाओं में शामिल हो गया।
पिता की आंखों में आंसू, बोले — बहुत समझाया था
नरेश के पिता भूदेव शर्मा उर्फ भूरी ने बताया कि उन्होंने बेटे को कई बार सुधरने की नसीहत दी थी। बड़े बेटे की मौत के बाद बहू की शादी नरेश से इसलिए कराई गई थी कि वह जिम्मेदारी समझे, लेकिन वह अपराध से दूर नहीं हुआ।
मुठभेड़ की होगी मजिस्ट्रेटी जांच
नरेश के एनकाउंटर के बाद प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के तहत मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम घटनास्थल पर जाकर वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर क्राइम सीन रिक्रिएट करेगी, ताकि मुठभेड़ के हर पहलू की पुष्टि हो सके।
अय्याशी में उड़ाया था लूट का पैसा
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि नरेश ने लूट के पैसों को अय्याशी में उड़ाया था। उसने न तो कोई संपत्ति खरीदी और न ही कोई स्थायी निवेश किया। फिलहाल, पुलिस ने बरामद रकम, दो देशी पिस्टल और रिवॉल्वर को मालखाने में जमा कर दिया है।
अब जांच में परिवार से होगी पूछताछ
पुलिस अब नरेश के परिजनों से पूछताछ करेगी ताकि उसके नेटवर्क, छिपे माल और बाकी गैंग से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सके।
नरेश का अंत वही हुआ जो हर अपराधी का होता है — कानून के हाथ लंबे हैं, और न्याय से बच पाना नामुमकिन।







