मुज़फ्फरनगर

संसार में बच्चों के लिए पिता ईश्वर और खुदा से भी बढ़करः समाजसेवी मनीष चौधरी

शहरी चौपाल ब्यूरो नितिन शर्मा 

मुज़फ्फरनगर। जनपद में साहित्यिक और सामाजिक चेतना को झकझोर देने वाला एक यादगार दिन तब दर्ज हुआ, जब प्रख्यात लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता नादिर राणा की नई पुस्तक आप बहुत याद आते हो, का लोकार्पण एक भावनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ। यह अवसर केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं था, बल्कि एक ऐसा क्षण था जहाँ साहित्य, परिवार, रिश्तों और समाज के मूल्यों की आत्मा एक साथ उपस्थित थी।

एम ए कांवेंट पब्लिक स्कूल के भव्य प्रांगण में आयोजित इस गरिमामय समारोह में जिले व प्रदेश की कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम की विशिष्ट बात रही राष्ट्रीय सामाजिक संस्था के अध्यक्ष एवं समाजसेवी मनीष चौधरी का प्रेरक संबोधन, जिसने उपस्थित जनसमूह को न केवल भावुक किया बल्कि पिता के संघर्ष और समर्पण के साथ ही परिवार के लिए त्याग के प्रति गहराई से सोचने पर मजबूर भी कर दिया। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सामाजिक संस्था के अध्यक्ष समाजसेवी मनीष चौधरी ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि पिता केवल एक रिश्ता नहीं है, वो एक समर्पण है, जो दिन-रात बिना थके आपके जीवन की नींव मजबूत करता है। पिता वो दरख्त है, जिसकी छाया में हम बड़े होते हैं, और हमें तब उसका महत्व समझ आता है, जब उसकी छांव एक दिन हमें छोड़ जाती है। उन्होंने कहा कि इस संसार में पिता का दर्जा ईश्वर और खुदा से कमतर नहीं है। वो सर्वस्व ही अपने बच्चों और परिवार पर लुटाते हुए हंसते हुए मुश्किलों को आत्मसात करता है। मनीष चौधरी ने कहा कि लेखक नादिर राणा की यह पुस्तक केवल उनके पिता को श्रद्धांजलि नहीं है, यह हर उस इंसान की कहानी है जिसने अपने पिता को देखा, समझा और कभी खोया है। हम अक्सर भगवान के लिए मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे जाते हैं, पर जो ईश्वर घर में चुपचाप बैठा होता है, वह ‘पिता’ होता है, जिसकी कोई पूजा नहीं होती, लेकिन जिसकी हर चुप्पी में एक दुआ छुपी होती है।

मनीष चौधरी ने न सिर्फ लेखक के प्रयास की सराहना की, बल्कि पुस्तक को समाज के लिए एक आइना और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी रचनाएँ केवल साहित्य नहीं होतीं, ये समाज को जोड़ने वाले पुल होती हैं। यह पुस्तक आने वाली पीढ़ी को अपने मूल्यों से जोड़ने का काम करेगी। इस भावुक वक्तव्य के दौरान कई दर्शकों की आँखें नम हो गईं। कार्यक्रम में एसपी अपराध इंदु सिद्धार्थ ने कहा कि इस पुस्तक ने रिश्तों की परतों को उजागर किया है। यह संवेदना का दस्तावेज़ है। पूर्व मंत्री योगराज सिंह ने इसे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ज्ञान का हस्तांतरण बताते हुए लेखन की प्रशंसा की। जेल अधीक्षक गाजियाबाद सीताराम शर्मा ने नादिर राणा के सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इनकी लेखनी समाज को जोड़ने का कार्य करती है। स्वामी गोरवानंद महाराज ने पुस्तक को आत्मा से आत्मा तक की यात्रा बताया। लेखक नादिर राणा ने कहा कि यह पुस्तक मेरे पिता की स्मृति को समर्पित है, लेकिन यह हर पिता की कहानी है, जो चुपचाप अपने बच्चों के लिए सब कुछ लुटा देता है। इस अवसर पर बुजुर्गों का सम्मान, सामाजिक चेतना और साइबर जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। कार्यक्रम के आयोजकों मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से फैजुर रहमान, प्रमुख समाजसेवी कुंवर देवराज पंवार, किसान नेता कमल मित्तल, भाजपा नेता अविनाश त्यागी, काउंसलर समृद्धि त्यागी, मुफ्ती ज़ुल्फ़िकार, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द मुज़फ़्फ़रनगर के सदर मौलाना मुकर्रम कासमी, मौलाना अब्दुल खालिक और रोटरी क्लब के नीरज बंसल के अलावा बबलू शर्मा, इंतज़ार राणा, वसीम अहमद, चौधरी युद्धवीर सिंह, गुलरेज सिद्दीकी, इरफ़ान अब्बासी, शारिक सैफी, शानू मौजूद रहे।

WebAdmin

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!