सहारनपुर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष विजयादशमी उत्सव उत्साह और अनुशासन के साथ सम्पन्न

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष उत्सवों की श्रृंखला में सहारनपुर महानगर के अन्तर्गत 15 नगरों की 34 बस्तियों में रविवार को विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन कार्यक्रम अत्यंत उत्साह, अनुशासन और गौरव के साथ सम्पन्न हुए। विजयादशमी उत्सव संघ के स्वत्व, स्वाभिमान और संगठन शक्ति का प्रतीक पर्व रहा। शताब्दी वर्ष के इस अमृत काल में यह आयोजन संघ की 100 वर्षों की अखंड यात्रा, अटूट समर्पण और राष्ट्र सेवा के शताब्दी संकल्प का घोषक बना।महानगर के विभिन्न नगरों में हुए कार्यक्रमों में बौद्धिक, गीत, प्रार्थना और गणवेशधारी पथ संचलन के माध्यम से स्वदेशी, अनुशासन और संगठन शक्ति का संदेश दिया गया। समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।प्रेरक प्रसंग विजय शाखा बागेश्वर नगर के दिव्यांग स्वयंसेवक कार्तिक ने अपने अदम्य संकल्प से लगभग 2.9 किलोमीटर का संचलन बिना रुके पूरा किया, जो सभी के लिए प्रेरणास्रोत बना। नगरवार प्रमुख आयोजन संत रविदास नगर में संघ शताब्दी का राष्ट्रीय संकल्प विषय पर केशव भाग, सह संघ चालक नेत्रपाल का बौद्धिक हुआ, 65 स्वयंसेवक उपस्थित रहे। माधव नगर की बलदेव व विवेक बस्तियों में जगदानंद व सुभाष के मार्गदर्शन में 100 से अधिक स्वयंसेवक जुड़े। शारदा नगर में 92 स्वयंसेवक शामिल रहे। सुभाष नगर की सिंहगढ़ व ध्रुव बस्तियों में क्रमशः राकेश लोटनी व वैभव (प्रांत युवा शक्ति प्रमुख) ने संबोधन किया। विवेकानंद नगर की दोनों बस्तियों में 138 से अधिक स्वयंसेवक रहे। केशव नगर में 138 स्वयंसेवक शामिल हुए। हकीकत नगर की नारायण व हकीकत बस्तियों में कविन्द्र व दीप के उद्बोधन के साथ 170 से अधिक स्वयंसेवक एवं नागरिक उपस्थित रहे। अरविंद नगर दयानंद बस्ती के कार्यक्रम में सौरभ नगर संघचालक का बौद्धिक रहा। महावीर नगर (हलालपुर) में महानगर संयोजक राहुल, कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि ने संबोधित किया। संघ की 100 वर्षों की गौरवगाथाः सन् 1925 में डॉ. हेडगेवार जी द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज भारत के प्रत्येक ग्राम, नगर और प्रवासी समाज तक पहुँच चुका है। शिक्षा, ग्राम विकास, सेवा, संस्कार, पर्यावरण, महिला जागरण और स्वदेशी जैसे क्षेत्रों में संघ की प्रेरणा से हजारों सेवाकार्य संचालित हैं शताब्दी वर्ष का यह विजयादशमी उत्सव इस संदेश के साथ सम्पन्न हुआ कि हम सब एक भारत, श्रेष्ठ भारत के निर्माता हैं।

 

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