सहारनपुर

………. साहिबे आलम कभी फुटपाथ भी देखा करो

इस्लामिया कॉलेज में तड़क पांच बजे तक चला नगर निगम द्वारा आयोजित मुशायरा

शहरी चौपाल ब्यूरो

सहारनपुर। ऐतिहासिक मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में खान वादा बदर के सहयोग से नगर निगम द्वारा इस्लामिया कॉलेज के मैदान में आल इण्डिया मुशायरे का आयोजन किया गया। उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रवासी भारतीय और वरिष्ठ समाजसेवी अजय गुप्ता, अनिल गुप्ता, समाजसेवी महेन्द्र तनेजा, मुशायरा संयोजक पार्षद मंसूर बदर, मसूद बदर, नवाज़िश खान, मेला चेयरमैन नीरज शर्मा आदि ने रिबन काटकर व शमा रोशन कर किया। तड़के पांच बजे तक चले मुशायरे में हजारों श्रोताओं की भीड़ ने शेर के हिसाब से शायरों को दाद दी। मुख्य अतिथि अजय गुप्ता ने इस अवसर पर नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन अय्यूब हसन बदर को भी स्मरण किया।

मुशायरा की शुरुआत मुंबई से आए शायर अल्ताफ ज़िया ने नाते पाक से की। शायर खुर्शीद हैदर ने ‘परिंदे पेड़ पर सहमे हुए है, शिकारी लेकर जाल आया हुआ है!मेरी जानिब मोहब्बत से ना देखो मोहब्बत पर जवाल आया है!’ पढ़ कर दाद बटोरी। बिलाल सहारनपुरी ने तो पूरी महफिल ही लूट ली, श्रोताओं ने खडे़ होकर वाहवाही की। बिलाल ने पढ़ा, ‘हम गरीबों पर गुजरी रात भी देखा करो,साहिबे आलम कभी फुटपाथ भी देखा करो।’ अंतराष्ट्रीय शायर काशिफ रज़ा ने कहा ‘तबियत जब बिगड़ती है तेरी चौखट पर आता हूं,तेरे बीमार ने अब तक शिफाखाना नहीं बदला।’ मुंबई से आए शायर महशर आफरीदी को श्रोताओं ने बार-बार सुना उन्होंने, ‘खराब वक्त में इज्जत रहे संभाले हुए,कभी ना जेब में रखे सिक्के उछाले हुए/डसा गया मैं लेकिन इलाज जानता हूं,ये सांप है तो मेरी आस्तीन के पाले हुए’ पढ़ कर लोगो की तालियां बटोरी।

मुंबई से आए शायर अल्तमश अब्बास ने कहा, ‘मेरे मरने से अगर फायदा होता इनका, दोस्त हर रोज मुझे जान से मारा करते।’ मध्य प्रदेश से आई शायर मनिका दुबे ने एक से बढ़कर एक शेर सुनाते हुए श्रोतओं का दिल जीत लिया। उन्होंने पढ़़ा ‘शहर के शोर में तन्हाइयां है, यहां तुम हो मगर वीरानियां है।’ शायर काशिफ अबरार ने ‘कि औलाद भी दी, दिए वालिदेन, अलिफ लाम मीम काफ़ और एन गएनं’ नजम पढ़ी तो पूरे मजमे ने खड़े होकर दाद दी। मुंबई से आए कई फिल्मों में गीत देने वाले शकील आज़मी को भी लोगो ने दिल लगाकर सुना। उन्होंने ‘खुद को इतना भी ना बचाया कर, बारिश हो तो भीग जाया कर।’ के अलावा कई शेर पढ़े और भरपूर दाद ली। शायर शबीना अदीब ने अपने अनूठे अंदाज में जब पढ़ा, ‘जो खानदानी रईस है वो मिजाज रखते है नरम अपना, तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत है नई नई।’पढ़कर खूब दाद ली।

लोगों के दिल की धड़कन नवाज़ देवबन्दी ने एक से बढ़कर एक शेर पढ़ लोगों का दिल जीत लिया। हाशिम फिरोजाबादी ने नौजवानों को एक से बढ़कर एक शेर सुनाए। उन्होंने ‘तालीम की रस्सी तुमने हाथ से क्यों छोड़ दी,अपने मुस्तकबिल की खुद इमारत क्यों तोड़ दी’ सुनाकर खूब दाद ली। जोहर कानपुरी ने फरमाया, जिनसे रोशन हो जहां ऐसे उजाले बन जाओ, दुख उठाकर भी खुशी बांटने वाले बन जाओ।’ इस्लामिया कॉलेज के खचाखच भरे मैदान और मंच पर पूरे हिन्दुस्तान के शायरों को देखकर जोहर कानपुरी ने कहा कि सहारनपुर का मुशायरा पूरी दुनिया का सबसे बड़ा मुशायरा है। उनके अलावा नजीम मुशायरा नदीम फरुख शायर नदीम शाद, इब्राहिम जिशान, अल्ताफ ज़िया, हिमांशी बाबरा, जहाज देवबंदी, नदीम अनवर ने एक से बढ़कर एक शेर सुना श्रोताओं की दाद बटोरी। इससे पूर्व कार्यक्रम संयोजक पार्षद मंसूर बदर ने अतिथियों एवं पार्षदों का स्वागत किया। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य लोगों के अलावा बड़ी संख्या में पार्षद भी मौजूद रहे।

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