उत्तर प्रदेश

मतदाता सूची की मांग को लेकर सपा का ज्ञापन, अखिलेश बोले- भाजपा राज में अन्याय चरम पर

लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले वर्ष 2003 की मतदाता सूची और 7 जनवरी 2025 को अंतिम प्रकाशन के बाद पुनरीक्षण शुरू होने तक की मतदाता सूची उपलब्ध कराने की मांग की है। सपा नेताओं ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे ज्ञापन में कहा कि यह सूचनाएं निशुल्क मिलने पर बीएलओ को मतदाता सूची को दुरुस्त कराने में पार्टी कार्यकर्ताओं का सहयोग मिल सकेगा।

ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश के 403 विधान क्षेत्रों में करीब 1 लाख 90 हजार पोलिंग स्टेशनों पर लगभग 15 करोड़ 42 लाख मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। विशेष पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची को शून्य (जीरो) कर बीएलओ घर-घर जाकर प्रत्येक मतदाता का सत्यापन करेंगे और गणना प्रपत्र फार्म भरेंगे। इसमें मृतक, स्थायी रूप से स्थानांतरित, बहुस्थानीय प्रविष्टियों और लापता मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे।

सपा का कहना है कि वर्ष 2003 के बाद से कई बार पोलिंग स्टेशनों का पुनर्गठन और विभाजन हुआ है, जिसके चलते बड़ी संख्या में मतदाताओं के बूथ और मतदान केंद्र बदल गए हैं। ऐसे मामलों की सही पहचान के लिए पुरानी सूचियों का उपलब्ध कराया जाना बेहद जरूरी है। ज्ञापन सौंपने वालों में सपा के सचिव केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चंद्र यादव और राधेश्याम सिंह शामिल रहे।

भाजपा सरकार में पीड़ितों को न्याय नहीं : अखिलेश

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में गरीबों और आम जनता का दमन-उत्पीड़न बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े और खास लोगों के मामलों में समझौते कराए जा रहे हैं जबकि पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा।

उन्होंने कहा कि सरकार का विरोध करने वालों को धमकाकर सत्ता के केंद्र तक ले जाया जाता है और उन्हें झूठे आश्वासन दिए जाते हैं। “सफेद मेज पर सफेद झूठ बोला जा रहा है,” अखिलेश ने कहा। सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कानून व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है तथा पुलिस हिरासत में मौतों का सिलसिला लगातार जारी है।

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