राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित संत देवी सुदीक्षा ने दिया सत्संग में संदेश, अहंकार को बताया पतन का कारण
भजन और भोजन साथ करने वाले परिवार की प्रभु करते हैं रक्षा


शहरी चौपाल ब्यूरो
नकुड़ (सहारनपुर)। नगर के बाईपास स्थित सरस्वती सत्संग सभा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित कथा के चौथे दिन राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित संत देवी सुदीक्षा ने श्रद्धालुओं को अमृतमय प्रवचनों से भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि पद, प्रशंसा और प्रतिष्ठा से अपने भीतर अहंकार की जड़ें जमाने वाले लोगों का पतन निश्चित है।
संत देवी सुदीक्षा ने प्रभु मिलन के लिए धैर्य, सहनशीलता, कोमलता और वचनों में मधुरता को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के कई प्रसंगों का स्मरण कराते हुए श्रद्धालुओं को धर्ममार्ग पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने सिंहासन और जमीन पर बैठने वालों का उदाहरण देते हुए कहा कि जमीन पर बैठने वाला व्यक्ति जमींदार होता है, जबकि चौकी पर बैठने वाला चौकीदार। इसलिए व्यक्ति को कभी भी पद के अहंकार में नहीं आना चाहिए।
समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिस परिवार में भजन और भोजन इकट्ठा बैठकर किया जाता है, उस परिवार की रक्षा के लिए भगवान स्वयं अपने दूत भेजते हैं। उन्होंने देश, धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए संत महात्माओं की प्रेरक कथाएं सुनाईं और कहा कि अपनी संस्कृति और धरोहर को बचाए रखना हम सबका कर्तव्य है।
नकुड़ नगरी का उल्लेख करते हुए संत देवी सुदीक्षा ने कहा कि यह पांडवों के भाई नकुल द्वारा बसाई गई नगरी मानी जाती है और यहां के निवासी सौभाग्यशाली हैं। उन्होंने गुरुदेव को मिले सहयोग के लिए नगरवासियों का आभार भी जताया।
कथा के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर मामराज सिंह, समरत लाल, महेश सैनी, भोपाल सैनी, राजकुमार भंडारी, जितेंद्र कालड़ा, सुभाष चुग, गुरुदयाल चुग, सौरव, गगन चुग, गोकुल बतरा, पुनीत अरोड़ा, बालेश ठाकुर, कमला चुग, प्रीति, ज्योति, सुषमा, कुसुम, रितु, सोनिया, संतोष, कमला, ज्योति, ममता सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।











