हिन्दू सम्मेलन में हिन्दू एकता व सनातन संस्कृति पर दिया जोर
हिंदू समाज को संगठित होने की आवश्यकता


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। हिन्दू एकता, सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक समरसता के प्रबल संदेश के साथ आयोजित हिंदू सम्मेलन में हिंदू समाज से संगठित होने का आह्वान किया। वक्ताओं ने हिंदू समाज के संरक्षण और संवर्द्धन को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। महानगर की प्रमुख शिक्षण संस्था जेवी जैन डिग्री कॉलेज के विशाल प्रांगण में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन का अतिथिगण ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया। कार्यक्रम में मंचासीन प्रमुख वक्ताओं प्रोफेसर राघवेंद्र स्वामी जी, बीके रानी दीदी, पंडित प्रगीत कौशिक एवं सरदार हरि लाल सिंह ग्रोवर ने अपने-अपने ओजस्वी उद्बोधनों के माध्यम से हिन्दू समाज को संगठित रहने का आह्वान किया। वक्ताओं ने एक स्वर में एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे का उद्घोष करते हुए कहा कि समाज की शक्ति उसकी एकता में निहित है। उन्होंने सनातन संस्कृति के मूल सिद्धांतों-सत्य, अहिंसा, सेवा, त्याग और सहिष्णुता पर विस्तार से प्रकाश डाला। अतिथिगण ने समाज सुधार, नैतिक मूल्यों की स्थापना और सांस्कृतिक रक्षा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना के बिना किसी भी राष्ट्र का समुचित विकास संभव नहीं है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को समाज को जागरूक करने वाला बताया। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक आशुतोष ने अपने प्रभावशाली और प्रेरणादायी भाषण में आरएसएस के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए संघ के सेवा, संगठन और राष्ट्र निर्माण के कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की एकता ही भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। उन्होंने सामाजिक विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में संगठित होने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि योग गुरू पदमश्री भारत भूषण ने कहा कि कहा कि सनातन संस्कृति केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक सम्पूर्ण पद्धति है, जिसने सदियों से भारतीय समाज को दिशा और संस्कार प्रदान किए हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ें और समाज व राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम का समापन हिन्दू सम्मेलन के अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल एडवोकेट के ओजस्वी और भावपूर्ण संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए सभी आगंतुकों, वक्ताओं और सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने समाज से आग्रह किया कि वह एकजुट होकर सनातन संस्कृति की रक्षा, सामाजिक समरसता की स्थापना और राष्ट्रहित के कार्यों में निरंतर सक्रिय भूमिका निभाएं। इससे पूर्व वैष्णवी नृत्यालय के बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। साथ ही मांसी संगीत व सांस्कृतिक चेतना मंच की ओर से भी प्रस्तुति दी गई। सम्मेलन के दौरान अनुशासन, सौहार्द और उत्साह का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसने आयोजन को ऐतिहासिक और प्रेरणास्पद बना दिया। कार्यक्रम में राजेंद्र अरोड़ा, हेमंत अरोड़ा, राहुल लखनपाल, संजय कपूर, संजय राणा, कुलदीप पुंडीर, मोहित गुप्ता, पीूष जैन, अनुराग माहेश्वरी, अमित गर्ग, अनमोल मल्होत्रा, पार्षद दिग्विजय सिंह, पार्षद सुनील पंवार, सुभाष सैनी, डी. के. बंसल, सुनील गुप्ता, पूर्व मंत्री संजय गर्ग, राजीव चानना, प्रेमप्रकाश शर्मा, बबलू सहित भारी संख्या में जिले भर से हजारों श्रद्धालुओं, संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों तथा युवाओं ने सहभागिता की।

















