केंद्रीय बजट 2026 पर विपक्ष का हमला, अखिलेश यादव और मायावती ने बताया जनविरोधी


शहरी चौपाल ब्यूरो
लखनऊ, । केंद्रीय बजट 2026 को लेकर विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने बजट को आम जनता, गरीबों और बहुजन समाज के हितों के प्रति उदासीन बताते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बजट को “भाजपाई बजट” करार देते हुए कहा कि इसका असर शेयर बाजार पर तुरंत देखने को मिला, जहां भारी गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भाजपा सरकार से जब कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से भी कोई राहत की अपेक्षा नहीं की जा सकती। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का हर बजट केवल पांच प्रतिशत लोगों के लिए होता है और यह आम जनता के बजाय अपने लोगों और कमीशनखोरी को साधने वाला बजट है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में न तो महंगाई से जूझ रही जनता की फिक्र की गई है और न ही बेरोजगारी से परेशान युवाओं के लिए कोई ठोस प्रावधान किया गया है। टैक्स में राहत न दिए जाने को उन्होंने टैक्स-शोषण बताया और बजट को निराशाजनक व निंदनीय करार दिया।
वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी केंद्रीय बजट 2026 को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बजट में योजनाओं, परियोजनाओं और बड़े-बड़े वादों की भरमार है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके परिणाम क्या होंगे, इस पर संदेह बना हुआ है। मायावती ने कहा कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सही नीयत से उनका क्रियान्वयन भी जरूरी है। उन्होंने बजट को सरकार की नीति, नीयत और सोच का आईना बताते हुए सवाल उठाया कि यह बजट वास्तव में गरीब और बहुजन हितैषी है या फिर पूंजीपतियों और बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाला।
मायावती ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पाने के लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व दिया गया है और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के कल्याणकारी संविधान की भावना के अनुरूप क्या कदम उठाए गए हैं, इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए कि पिछले बजट में किए गए दावे और वादे कितने पूरे हुए हैं और क्या वास्तव में लोगों के जीवन में कोई गुणात्मक बदलाव आया है। उनका कहना था कि जीडीपी के आंकड़ों से अधिक महत्वपूर्ण आम जनता के जीवन में वास्तविक और व्यापक विकास है, जिसका आकलन बजट की सराहना से पहले जरूरी है।
कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026 को लेकर विपक्ष ने सरकार पर आम जनता की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने का आरोप लगाते हुए इसे मायूस करने वाला बताया है।

















