सहारनपुर

सरकारी वार्षिक कैलेंडर में सहारनपुर मण्डल को विशेष स्थान

12 पेज के दीवार व टेबल कैलेंडर में 2 पेज और 8 प्रमुख स्थल शामिल, “विरासत भी विकास भी” थीम पर आधारित

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के वर्ष 2026 के 12 पेज के सरकारी दीवार कैलेंडर और टेबल कैलेंडर में सहारनपुर मण्डल को विशेष महत्व दिया गया है। शासन की इस वर्ष की थीम “विरासत भी विकास भी” के अंतर्गत सहारनपुर मण्डल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और तेजी से हो रहे विकास कार्यों को प्रमुखता से दर्शाया गया है। दोनों कैलेंडरों में आकर्षक और प्रभावी सामग्री के माध्यम से प्रदेश की धरोहरों के संरक्षण और विकास की झलक प्रस्तुत की गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सहारनपुर मण्डल को प्राथमिकता देते हुए माँ शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ और महाभारत कालीन तीर्थ स्थल शुक्रताल के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दोनों स्थलों पर करोड़ों रुपये की लागत से तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं के विस्तार और सौंदर्यीकरण के कार्य कराए जा रहे हैं।

मण्डलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार, जिलाधिकारी मनीष बंसल तथा मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के सतत प्रयासों से सहारनपुर मण्डल में विरासत और विकास की कड़ी और मजबूत हुई है। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि माँ शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ पर निरंतर विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। साथ ही सहारनपुर में स्थापित माँ शाकुम्बरी राजकीय विश्वविद्यालय मण्डल का प्रथम विश्वविद्यालय है, जो शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। नव निर्मित खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला से खाद्य पदार्थों की जांच प्रक्रिया तेज होगी, जबकि डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम खेलों के क्षेत्र में जनपद के युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोलेगा।

जिला सूचना अधिकारी दिलीप कुमार गुप्ता ने बताया कि सहारनपुर मण्डल की अनूठी विरासत और बड़े पैमाने पर हो रहे विकास कार्यों को दर्शाते हुए आकर्षक चित्र दोनों सरकारी कैलेंडरों में शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि अप्रैल माह का पेज सहारनपुर जनपद को मिला है, जिसमें माँ शाकम्भरी देवी, माँ शाकुम्बरी राजकीय विश्वविद्यालय, डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम तथा नानौता स्थित नव निर्मित खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला के चित्र शामिल हैं।

वहीं दिसंबर माह का पेज मुजफ्फरनगर जनपद को आवंटित किया गया है, जिसमें महाभारत कालीन तीर्थ स्थल शुक्रताल के पांच हजार वर्ष पुराने वटवृक्ष, शुक्रताल धाम, शुक्रताल घाट, अटल आवासीय विद्यालय और गो अभ्यारण्य के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। शुक्रताल वही पावन स्थल है, जहां राजा परीक्षित को शुकदेव मुनि ने लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व भागवत कथा सुनाई थी। आज भी यह स्थल देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

सरकारी कैलेंडर में सहारनपुर मण्डल को मिली यह प्रमुखता जनपद के लिए गौरव की उपलब्धि मानी जा रही है।

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