तिब्बती मार्केट पर फिर चला निगम का डंडा, 18 जनवरी तक अल्टीमेटम, 19 को बुलडोजर की चेतावनी


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के सौंदर्यीकरण और यातायात व्यवस्था सुधारने की कवायद में एक बार फिर तिब्बती मार्केट नगर निगम के निशाने पर आ गई है। नगर निगम ने शुक्रवार को तिब्बती मार्केट में अवैध कब्जों पर नोटिस चस्पा कर 18 जनवरी तक स्वयं कब्जा हटाने का अल्टीमेटम दिया है। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित तिथि तक कब्जा नहीं हटाया गया तो 19 जनवरी को निगम द्वारा बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी।
नगर आयुक्त शिपु गिरि के आदेश पर अतिक्रमण प्रभारी सुधीर शर्मा ने टीम के साथ तिब्बती मार्केट पहुंचकर सभी दुकानों और थलों पर नोटिस चस्पा किए तथा दुकानदारों से नोटिस रिसीव भी कराए। निगम की इस कार्रवाई से पूरे बाजार में हड़कंप मच गया है और व्यापारियों में भविष्य को लेकर चिंता गहराने लगी है।
राजनीति भी गरमाई, पार्षद खुले तौर पर व्यापारियों के साथ
निगम की सख्ती के बीच तिब्बती मार्केट का मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। सूत्रों के अनुसार कुछ पार्षद खुलकर तिब्बती मार्केट के व्यापारियों के समर्थन में सामने आ गए हैं। इन पार्षदों का कहना है कि जब तक व्यापारियों को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक मार्केट को उजड़ने नहीं दिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि ये पार्षद महापौर और नगर आयुक्त से मिलकर व्यापारियों को अतिरिक्त समय दिलाने या किसी अन्य स्थान पर बसाने की मांग करेंगे। वहीं व्यापारियों को भी फिलहाल कहीं न जाने और डटे रहने की सलाह दी जा रही है।
कैसे पड़ी ‘तिब्बती मार्केट’ नाम की नींव
तिब्बती मार्केट का इतिहास भी काफी दिलचस्प है। वर्षों पूर्व तिब्बत से पलायन कर देहरादून और उत्तराखंड की पहाड़ियों में रहने वाले तिब्बती समुदाय के लोग सर्दियों के मौसम में सहारनपुर आकर गर्म कपड़ों की बिक्री किया करते थे। करीब छह माह यहां रहकर व्यापार करने के बाद वे वापस लौट जाया करते थे।
इसी वजह से यह इलाका तिब्बती मार्केट के नाम से जाना जाने लगा। लेकिन समय के साथ स्थानीय लोगों ने धीरे-धीरे यहां धन और बल का प्रयोग कर कब्जा जमाना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि तिब्बती व्यापारी यहां से पलायन करने को मजबूर हो गए और आज यह बाजार पूरी तरह स्थानीय लोगों के कब्जे में आ चुका है।
पक्के कब्जे, लोहे के बॉक्स और टीन शेड
वर्तमान में तिब्बती मार्केट में अधिकांश दुकानदारों ने पक्के लोहे के बॉक्स और पीछे टीन शेड लगाकर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। बताया जा रहा है कि यहां के अधिकतर कब्जाधारी एक ही संप्रदाय से जुड़े हुए हैं। नगर निगम का मानना है कि इन कब्जों के कारण सड़क संकरी हो गई है और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
2024 में भी मिली थी मोहलत
यह पहली बार नहीं है जब तिब्बती मार्केट को खाली कराने की कोशिश की जा रही हो। वर्ष 2024 में भी निगम ने इसी तरह नोटिस जारी कर कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे। उस समय भी कुछ पार्षदों के हस्तक्षेप से व्यापारियों को समय दिला दिया गया था। लेकिन इसके बावजूद कब्जे नहीं हटे और स्थिति जस की तस बनी रही।
अब निगम या कब्जाधारियों में कौन पड़ेगा भारी?
सहारनपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद सड़कों के चौड़ीकरण और फुटपाथों के नवीनीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे में नगर निगम इस बार तिब्बती मार्केट को लेकर पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि 18 जनवरी के बाद क्या नगर निगम अपने फैसले पर अडिग रहते हुए बुलडोजर कार्रवाई करेगा या फिर एक बार फिर राजनीतिक दबाव के आगे झुककर कब्जाधारियों को राहत मिलेगी। तिब्बती मार्केट का भविष्य फिलहाल असमंजस और अनिश्चितता के गर्त में नजर आ रहा







