सहारनपुर

1860 में हुई थी सहारनपुर बार की स्थापना, सर्वसम्मति से चुने जाते थे अध्यक्ष

 

शहरी चौपाल ब्यूरो 
सहारनपुर। सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन का इतिहास करीब 165 वर्ष पुराना है। वर्ष 1860 में स्थापित इस बार का क्षेत्राधिकार उस समय केवल सहारनपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि बिजनौर, यमुनानगर, देहरादून, गढ़वाल और इंद्री जैसे जिले भी इसके अंतर्गत आते थे। इन सभी क्षेत्रों के वादों का निस्तारण सहारनपुर में ही किया जाता था।
वरिष्ठ अधिवक्ता बिशंबर सिंह पुंडीर के अनुसार, प्रारंभिक दौर में ज्यूडिशियल कैडर की व्यवस्था थी और अधिकारियों की नियुक्ति हाईकोर्ट द्वारा की जाती थी। उस समय सहारनपुर, देवबंद और नकुड़ में न्यायालय संचालित होते थे, जिनके अधिकारी कलेक्ट्रेट परिसर में ही बैठते थे। बाद में एडीएम (ज्यूडिशियल) का पद सृजित हुआ और आईपीसी व सीआरपीसी से जुड़े मामलों की सुनवाई दीवानी कचहरी में होने लगी। इसके बाद अधिवक्ताओं ने भी कलेक्ट्रेट परिसर छोड़कर दीवानी कचहरी में बैठना शुरू किया।
सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन की वर्तमान इमारत का निर्माण वर्ष 1901 में कराया गया, जबकि इसका विधिवत पंजीकरण वर्ष 1977 में रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत हुआ। इसी वर्ष से नियमित रूप से कार्यकारिणी चुनाव कराए जाने लगे। अब तक एसोसिएशन में 39 अध्यक्ष और महासचिव चुने जा चुके हैं, जिनके नाम बोर्ड पर अंकित हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार, प्रारंभिक वर्षों में अधिवक्ताओं की संख्या कम होने के कारण अध्यक्ष और सचिव का चयन बैठकों में सर्वसम्मति से कर लिया जाता था। जैसे-जैसे अधिवक्ताओं की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे चुनावी प्रक्रिया शुरू हुई। पहले अध्यक्ष और सचिव का कार्यकाल एक वर्ष का होता था, बाद में कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया। वर्ष 2013 में सचिव पद के स्थान पर महासचिव पद की व्यवस्था लागू की गई।
सहारनपुर अधिवक्ता एसोसिएशन न केवल जिले की न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, बल्कि अपने लंबे और गौरवशाली इतिहास के कारण प्रदेश की प्रमुख बार एसोसिएशनों में भी एक विशिष्ट स्थान रखती है।

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