सहारनपुर

50 साल पुरानी तिब्बती मार्केट पर संकट, नगर निगम की कार्रवाई की तैयारी

नवंबर 2024 में जारी हो चुके हैं खाली करने के नोटिस, 70 दुकानें बताई जा रहीं अवैध

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। महानगर की करीब 50 साल पुरानी तिब्बती मार्केट पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नगर निगम ने इस मार्केट को अवैध बताते हुए हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। निगम की ओर से नवंबर 2024 में दुकानदारों को जगह खाली करने के नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब तक किसी ने अतिक्रमण नहीं हटाया।

नगर निगम का कहना है कि तिब्बती मार्केट सड़क पर अवैध रूप से संचालित हो रही है और इसके कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। वर्तमान में सड़क के दोनों ओर करीब 70 दुकानें संचालित हैं, जिनके लिए किसी भी दुकानदार को विधिवत स्थान आवंटित नहीं किया गया है।

कैसे अस्तित्व में आई तिब्बती मार्केट

तिब्बती मार्केट की शुरुआत करीब पांच दशक पहले हुई थी। सर्दियों के मौसम में तिब्बती समुदाय के लोग यहां अस्थायी रूप से फड़ लगाकर गर्म कपड़े बेचा करते थे। दिन में सामान बेचने के बाद शाम को सड़क खाली कर दी जाती थी। धीरे-धीरे स्थानीय लोगों ने इन फड़ों पर कब्जा करना शुरू कर दिया और समय के साथ स्थायी अतिक्रमण बढ़ता चला गया।

करीब 20 वर्ष पहले तक इस मार्केट में तिब्बतियों की भागीदारी लगभग 30 प्रतिशत थी, जो अब लगभग समाप्त हो चुकी है।

सड़क पर स्थायी अतिक्रमण का आरोप

नगर निगम के अनुसार दुकानदारों ने लोहे के बॉक्स रखकर, तारपाल लगाकर और पीछे तीन छेद बनाकर स्थायी रूप से अस्थायी दुकानों का रूप दे दिया है। दुकानों के कारण राजकीय इंटर कॉलेज के पीछे की दीवार से सड़क तक पूरा क्षेत्र अतिक्रमण की चपेट में है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है।

महापौर डॉ. अजय कुमार ने पूरी मार्केट को अवैध बताते हुए अधिकारियों को इसे हटाने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा, “तिब्बती मार्केट सड़क पर अतिक्रमण कर बनाई गई है। इसकी वजह से दिनभर जाम लगा रहता है और आम नागरिकों को परेशानी होती है। इसे हटाने के निर्देश दिए गए हैं।”

दुकानदारों ने रखा अपना पक्ष

तिब्बती मार्केट के अध्यक्ष नौशाद सिद्दीकी सहित दुकानदार तबरेज, राशिद, शहजाद आदि का कहना है कि उनके परिवार दशकों से यहां दुकान लगाकर रोजी-रोटी चला रहे हैं। उनका दावा है कि नगर निगम द्वारा उनका पंजीकरण किया गया है, जिसके प्रमाण उनके पास मौजूद हैं।

दुकानदारों के अनुसार वे हर महीने 600 रुपये से अधिक नगर पथ विक्रेता शुल्क भी जमा करते हैं। उनका कहना है कि यदि मार्केट हटाई जाती है तो सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

फिलहाल नगर निगम कार्रवाई के मूड में है, वहीं दुकानदार अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन और दुकानदारों के बीच इस पुराने बाजार का भविष्य किस दिशा में तय होता है।

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