सहारनपुर

योगीराज में दबंग कॉलोनाइजरों की हेकड़ी की निकली हवा, शासन प्रशासन ने नोटिस भेजकर मांगा जवाब,

जवाब नहीं दिया तो अवैध कॉलोनियों पर चल सकता है बाबा का बुलडोजर सदमे में गए कॉलोनाइजर व खरीददार

खबर का असर…….

 

खबर छपते की हरकत में आए अधिकारी,अवैध कॉलोनी काटने वाले कालोनाइजरों को जिला पंचायत ने किए नोटिस जारी

अवैध कॉलोनियों पर होगी बुलडोजर की कार्यवाही,कालोनाइजरों में मचा हड़कंप

सोमपाल कश्यप

बेहट  । तहसील बेहट के ग्रामीण क्षेत्रों सलेमपुर गदा,लोदीपुर,रसूलपुर, इस्माइलपुर अंबेहटा,खुशहालपुर व मिर्जापुर में काटी गई अवैध कॉलोनियों का मुद्दा “शहरी चौपाल समाचार पत्र”ने प्रमुखता से उठाया था। इस प्रमुख मुद्दे की जांच शुरू हो गई है।जाँच की भनक लगने क़े बाद अवैध कॉलोनियां काटने वाले कालोनाइजरों में हड़कंप मच गया है अवैध कॉलोनियों काटे जाने का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों ने तत्काल जांच आदेश जारी किए है।वही जिला पंचायत ने मिर्जापुर में अवैध कॉलोनियों काटे जाने को लेकर कालोनाइजरों को नोटिस जारी जारी कर दिये है जिससे कालोनाइजरों में हड़कंप मच गया है।बताया जा रहा है कि योगीराज में दबंग कॉलोनाइजरों की हेकड़ी की हवा निकल चुकी है स्थानीय शासन प्रशासन ने कॉलोनाइजरों को नोटिस भेजकर जवाब मांगने की कवायद की है, यदि जवाब नहीं दिया गया तो अवैध कॉलोनियों पर बाबा का बुलडोजर कभी भी चल सकता है इस कार्यवाही से कॉलोनाइजर व खरीददार सदमे में चले गए है।

यदि आरोपी कालोनाइजरो ने समय रहते नोटिस का जवाब नहीं दिया गया तो प्रशासन आगे की कार्यवाही करते हुए अवैध कॉलोनियों पर बुल्डोजर चला सकता है।बताते चले ग्रामीण क्षेत्रों मे काटी गई कालोनियों में मूलभूत सुविधाए जैसे बिजली,पानी,खेल के मैदान व सड़के,सिवरेज आदि की व्यवस्था नहीं है जिससे लोगों में कालोनाइजरों के खिलाफ रोष पनप रहा था और बार बार कालोनाइजरों को कॉलोनी में सुविधा मुहैया कराने की मांग कर रहे थे।लेकिन उनको कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई गई।इसी मुद्दे को “शहरी चौपाल” समाचार पत्र ने जोर शोर से उठाया था।जिसके बाद अवैध कालोनियों की जांच के आदेश जारी होने क़े बाद हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

 

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अनुमति और अनुमोदन….……..

 

कॉलोनी बनाने से पहले जिला पंचायत,ग्राम पंचायत से योजना का अनुमोदन लेना होता है।

ग्राम पंचायत से भी अनुमति की आवश्यकता हो सकती है।

कॉलोनी के लिए एक स्पष्ट और मंजूर नक्शा होना चाहिए, जिसमें सड़क, सीवरेज और अन्य सुविधाएं शामिल होनी चाहिए।

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कमजोर वर्ग के लिए प्रावधान……

कुल प्लॉट या आवासों का कम से कम 20% हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित करना होता है।

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सुरक्षा और सुविधाएं……….

 

कॉलोनी में सभी आवश्यक बुनियादी ढाँचे, जैसे बिजली, पानी और सीवरेज की सुविधा होनी चाहिए।

बैंक से लोन और अन्य सरकारी सहायता के लिए भी ये शर्ते पूरी होनी चाहिए।

महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना अनुमति के काटी गई कॉलोनियों में प्लॉट खरीदना अवैध है और इसमें कई तरह के जोखिम होते हैं, जिनमें कानूनी कार्रवाई, वित्तीय नुकसान और बुनियादी सुविधाओं का अभाव शामिल है।

हाल ही में चिलकाना-गंदेवड मार्ग पर ग्राम सलेमपुर गदा, लोदीपुर,रसूलपुर,इस्माइलपुर अंबेहटा,खुशहालपुर व मिर्जापुर में मुख्य मार्ग के किनारे सभी नियम कायदों को दरकिनार करते हुए कालोनाइजरों के द्वारा कॉलोनीया काटकर जमीन बेच दी गई है जिनमें न सड़कों की व्यवस्था,न बिजली की व्यवस्था न पानी की व्यवस्था ना ही नाली,पार्क आदि कुछ भी नहीं है केवल कृषि भूमि को ओने-पौने दामों में खरीद कर आवासीय एवं दुकानों के रूप में मनमाने दामों में बेची गई है।

यदि इन कॉलोनीयों की गहनता से जांच की जाए तो कोई भी नियम या शर्त पूरे नहीं पाए जाएंगे बड़ा मामला तो इस्माइलपुर अंबेहटा में देखने को मिला है जहां एक कॉलोनाइजर ने 11000 व 33000 की विद्युत लाइन के नीचे ही कॉलोनी काटकर शासन प्रशासन को गुमराह किया है।इतना ही नहीं कॉलोनाइजरों एवं आवासीय जमीन बिकवाने वाले दलालों की जांच की जाए तो बहुत बड़ा खेल सामने निकल कर आ सकता है।

सोमपाल कश्यप शहरी चौपाल ब्यूरो 

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