मोक्षायतन में भारत योग के 21 नए योगाचार्य दीक्षित, घर से जंगल तक चला गहन प्रशिक्षण


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर,। मोक्षायतन योग संस्थान में भारत योग परंपरा के अंतर्गत 21 नए योगाचार्यों को विधिवत दीक्षा प्रदान की गई। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों गुजरात, कर्नाटक, हैदराबाद, बैंगलोर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, इंदौर सहित दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों और विदेशों से आए विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण पूर्ण कर योगाचार्य बनने का गौरव प्राप्त किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इन विद्यार्थियों ने सबसे पहले भारत योग की 500 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग ली, जिसके बाद वे क्रमशः योग इंस्ट्रक्टर और योग शिक्षक बने। अंतिम चरण में योगाचार्य कोर्स के अंतर्गत सभी प्रशिक्षार्थियों ने गुरु मां आचार्य प्रतिष्ठा एवं गुरुदेव स्वामी भारत भूषण जी के प्रत्यक्ष सान्निध्य में गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके उपरांत वैदिक यज्ञ एवं संकल्प के साथ सभी 21 प्रशिक्षुओं को भारत योग आचार्य के रूप में दीक्षित किया गया।
मोक्षायतन केंद्र की निदेशक एवं विश्व प्रसिद्ध योग गुरु आचार्य प्रतिष्ठा जी ने बताया कि ये सभी विद्यार्थी जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनकी योग यात्रा स्वयं को स्वस्थ और संयत रखने की भावना से शुरू हुई, जो भारत योग की ऑनलाइन थेरेपी कक्षाओं से जुड़ते हुए आगे बढ़ी। भारत योग के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक लाभों को समझने के बाद इनके मन में योगमय जीवन को गहराई से जानने की जिज्ञासा जागी, जिसके परिणामस्वरूप आज ये योगाचार्य बने हैं और समाज में योग के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए तैयार हैं।
संस्थान के परमाध्यक्ष एवं योग विद्या के क्षेत्र में वर्ष 1991 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित स्वामी भारत भूषण जी ने बताया कि योगाचार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन सहारनपुर स्थित मोक्षायतन योग संस्थान के साथ-साथ पर्वतीय एवं प्राकृतिक वातावरण में इसलिए किया जाता है, ताकि साधक प्रकृति और योग के गहरे संबंध को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकें। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भले ही योग शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रम ऑनलाइन कराए गए, लेकिन शास्त्रों के अनुसार “गुरुपदिष्ट मार्गेण योगमेव समभ्यसेत” की परंपरा का पालन करते हुए आचार्य बनने के लिए गुरु के प्रत्यक्ष सान्निध्य में रहकर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है।
प्रशिक्षण प्रमुख गुरु मां आचार्य प्रतिष्ठा ने बताया कि इस अंतिम चरण में प्रशिक्षुओं को योग यज्ञ दर्शन, वैकल्पिक चिकित्सा तथा व्यवहारिक शिक्षण का गहन अनुभव कराया गया। लोक कल्याण के संकल्प के साथ प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद सभी 21 नव-योगाचार्यों को यज्ञ साक्षी में भारत योग आचार्य के रूप में दीक्षित किया गया।







