पंचायत चुनाव में एसआईआर लागू करने की मांग खारिज
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को बताया सारहीन, मतदाता सूची में 40 लाख से अधिक की बढ़ोतरी


शहरी चौपाल ब्यूरो
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) लागू करने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका को सारहीन करार देते हुए खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश संत कबीर नगर निवासी नरेंद्र कुमार त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया 18 जुलाई 2025 से ही प्रारंभ हो चुकी है और इसकी अस्थायी मतदाता सूची 23 दिसंबर 2025 को प्रकाशित की जानी है। ऐसे में केवल इस आधार पर कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए जारी दिशा-निर्देश पंचायत चुनावों में भी लागू किए जाएं, न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं ठहराया जा सकता। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में 40 लाख से अधिक की बढ़ोतरी
इधर, पंचायत चुनाव के लिए कराए गए विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान में बड़ी संख्या में नए मतदाताओं को जोड़ा गया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त आरपी सिंह ने बताया कि इस अभियान के दौरान 1 करोड़ 81 लाख 96 हजार 367 नए मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए गए हैं, जबकि 1 करोड़ 41 लाख 76 हजार 809 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पिछली मतदाता सूची की तुलना में कुल 40 लाख 19 हजार 558 मतदाताओं (3.26 प्रतिशत) की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पुनरीक्षण से पहले पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में 12 करोड़ 29 लाख 50 हजार 52 वोटर थे, जो अब बढ़कर 12 करोड़ 69 लाख 69 हजार 610 हो गए हैं।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि हटाए गए नामों में मृत, विस्थापित और डुप्लीकेट मतदाता शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 53 लाख 67 हजार 410 डुप्लीकेट मतदाता पाए गए। आंकड़ों के अनुसार, 18 से 23 वर्ष आयु वर्ग के 1.05 लाख नए मतदाता पहली बार वोटर के रूप में सूची में जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि पुनरीक्षण अभियान के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने को प्राथमिकता दी गई और यह भी सुनिश्चित किया गया कि कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न रहे। तराई के जिलों में इस दौरान सबसे अधिक मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।







