चिलकाना थाना क्षेत्र में मुस्लिम परिवार पर की गई पुलिस कार्रवाई पर विवाद.
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष ने जताया कड़ा आक्रोश


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर , जनपद सहारनपुर के चिलकाना थाना क्षेत्र के ग्राम चोरा कला में एक मुस्लिम परिवार पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। परिवार का एक युवक पिछले एक वर्ष से दुबई में नौकरी कर रहा है। उसके परिजनों ने चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार SIR फॉर्म पर उसके स्थान पर हस्ताक्षर कर फॉर्म जमा कर दिया था, जिसकी अनुमति आयोग किसी भी परिजन को देता है और फॉर्म में त्रुटि होने पर सुधार का भी मौका उपलब्ध है हालांकि, इस पूरे मामले को गंभीर अपराध मानते हुए चिलकाना थाना अध्यक्ष अपने दल-बल के साथ परिवार के घर पहुंचे और कार्रवाई इस प्रकार की गई मानो कोई बड़ा अपराध उजागर हुआ हो। आरोप है कि परिवार की दो महिलाओं और दो भाइयों को पुलिस गाड़ी में बैठाकर थाने ले जाया गया। महिलाओं को कई घंटे थाने में बैठाए रखने के बाद दो भाइयों को जेल भेज दिया गया। थाना अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें SIR फॉर्म पर फर्जी हस्ताक्षर करने के आरोप में जेल भेजा गया है। वहीं, जब 9 दिसंबर की शाम कांग्रेस महानगर अध्यक्ष मनीष त्यागी थाने पहुंचे और इस कार्रवाई पर सवाल उठाए तो कथित तौर पर थाना इंचार्ज ने कहा कि आरोपियों को फर्जी हस्ताक्षर में नहीं, बल्कि धारा 151 में जेल भेजा गया है।मनीष त्यागी ने मौके पर ही कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि धारा 151 आमतौर पर दंगा-फसाद की आशंका में लगाई जाती है, जबकि गांववासियों ने स्पष्ट बताया कि परिवार या गांव में किसी तरह का विवाद तक नहीं हुआ था। आरोप है कि बिना किसी आधार के मुस्लिम परिवार को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई केवल समाज में गलत संदेश फैलाने के उद्देश्य से की गई।गांववालों ने बताया कि पुलिस जिस समय घर पहुंची, उसी समय परिवार में एक मृत्यु हुई थी और घर में मातम पसरा हुआ था। इसके बावजूद पुलिस ने कठोर कार्रवाई कर परिवार की महिलाओं तक को थाने ले जाकर घंटों बैठाए रखा। इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस महानगर अध्यक्ष मनीष त्यागी ने तीखी नोकझोंक के बीच थाना अध्यक्ष को चेतावनी दी कि यदि इस मामले में पुलिस की भूमिका दोषपूर्ण पाई गई तो वे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों, खासकर किसी समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।मामला अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है, और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है…*







