उत्तर प्रदेश

रामनगरी में आज ऐतिहासिक क्षण: पीएम मोदी करेंगे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पर भगवा ध्वजारोहण, अयोध्या दुल्हन की तरह सजी

शहरी चौपाल ब्यूरो 

अयोध्या। श्रीराम विवाह पंचमी के पावन अवसर पर आज रामनगरी एक ऐतिहासिक अध्याय की साक्षी बनने जा रही है। अभिजीत मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराएंगे। इस ध्वज पर सूर्य, कोविदारा वृक्ष और ‘ॐ’ की आकृति अंकित है, जो शौर्य, परंपरा और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है।

अयोध्या में भव्यता ऐसी है कि मानो त्रेता युग सजीव हो उठा हो। रामपथ, भक्तिपथ, धर्मपथ और जन्मभूमि पथ समेत शहर की सभी प्रमुख मार्गों पर राम धुन गूंज रही है। चौक-चौराहे 1000 क्विंटल फूलों से सजाए गए हैं। श्रद्धालुओं का जनसैलाब सरयू किनारे उमड़ रहा है, जहां स्नान कर भक्त मंदिरों में दर्शन-पूजन कर रहे हैं।

ध्वजारोहण समारोह और प्रधानमंत्री के आगमन के मद्देनज़र सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए गए हैं। एसपीजी, एनएसजी और एटीएस की टीमें हर मार्ग पर मुस्तैद हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रेज़रर गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि “पांच सदियों बाद वह दिन आ ही गया, सारी तैयारियां पूरी हैं।” सीएम योगी आदित्यनाथ और सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी तैयारियों की समीक्षा कर संतोष जताया।

धर्मध्वजा विशेष तकनीक से बनाई गई है जो भयंकर तूफान में भी सुरक्षित रहेगी और हवा बदलने पर बिना उलझे स्वतः पलट जाएगी। इसके दंड पर 21 किलो सोना मढ़ा गया है और यह मंदिर से लगभग 4 किलोमीटर दूर से भी दिखाई देगी।

प्रधानमंत्री मोदी लगभग 1.5 किमी लंबे रोड शो के माध्यम से साकेत कॉलेज से श्रीराम जन्मभूमि तक पहुंचेंगे। रामपथ को 8 जोनों में बांटा गया है, जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पारंपरिक थालियों और फूल-मालाओं के साथ प्रधानमंत्री की अगवानी करेंगी। मंदिर निर्माण में 2 करोड़ से अधिक दान देने वाले 100 प्रमुख दानदाताओं को भी समारोह में आमंत्रित किया गया है।

अयोध्या के मुस्लिम चेहरे इकबाल अंसारी ने भी इस ऐतिहासिक क्षण पर सहयोग और खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “अयोध्या धर्म की पवित्र भूमि है। भगवान राम के मंदिर के ध्वजारोहण का साक्षी बनना गर्व का विषय है। मुझे भी बुलाया गया है, मैं अवश्य जाऊंगा।”

रामनगरी में आज उत्सव, आस्था और गौरव का विशाल संगम दिखाई दे रहा है। पूरे देश की निगाहें इस ऐतिहासिक ध्वजारोहण पर टिकी हैं।

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