प्राथमिक विद्यालय छुटमलपुर नंबर 2 में देवोत्थान एकादशी पर बच्चों को दी गई धार्मिक व वैज्ञानिक जानकारी


शहरी चौपाल ब्यूरो
छुटमलपुर (सहारनपुर)। प्राथमिक विद्यालय छुटमलपुर नंबर 2 में शनिवार को देवोत्थान एकादशी के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिक्षिका अंजली आर्य ने बच्चों को हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले देवोत्थान एकादशी और तुलसी विवाह के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु के चार माह के शयन के पश्चात जागने का पर्व देवोत्थान एकादशी कहलाता है। यह अपने भीतर के देवत्व को जागृत करने का प्रतीक भी है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की आराधना भजन, स्तोत्र पाठ और वाद्य यंत्रों के साथ करते हैं। उन्होंने कहा कि देवउठनी एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
अंजली आर्य ने आगे बताया कि इस दिन के बाद चातुर्मास में रुके हुए विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। उन्होंने तुलसी विवाह की पौराणिक कथा सुनाते हुए बताया कि यह भक्त वृंदा से संबंधित है, जिनके श्राप और वरदान के परिणामस्वरूप तुलसी का जन्म हुआ। तुलसी को देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ माना जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दृष्टि से तुलसी का पौधा लगभग 5000 वर्ष पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप में उत्पन्न हुआ था और यह आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण अंग है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने शिक्षिका से उत्सुकता भरे प्रश्न पूछे जिनका संतोषजनक उत्तर दिया गया। साथ ही बच्चों ने शिक्षिका के निर्देशन में देवोत्थान एकादशी विषय पर आकर्षक पोस्टर भी बनाए।
शिक्षिका अंजली आर्य ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा से बच्चों में ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता और बहुमुखी विकास को भी बढ़ावा मिलता है।







