चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण का आधार: न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तरूण सक्सेना ने कहा कि किसी देश के नागरिक ही उसकी शक्ति, ध्वजवाहक और उसकी पहचान होते हैं। इसलिए सच्चरित्र संस्कारवान नागरिकों का निर्माण सबल राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला है। न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना आज यहां मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योगाश्रम में विचार व्यक्त कर रहे थे। वेद की ऋचाओं का सस्वर पाठ करके साधकों को वेद के राष्ट्रीय प्रार्थना मंत्र के संदर्भ में श्री सक्सेना ने कहा कि मोक्षायतन द्वारा समाज में रोपित हो रही योगसाधना और वेद की ध्वनि से चरित्रवान नई पीढ़ी को जीवन की सही दिशा देना राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में बड़ा योगदान है। उन्होंने आशा जताई कि चरित्रवान नागरिक राष्ट्र को और मजबूत करने व दुनिया के सामने राष्ट्रीय चरित्र पर बड़ी छाप छोड़ने में सफल होंगे। उन्होंने सत्कर्म और कर्तव्यपरायणता की भाषा को शब्दों की भाषा से अधिक प्रभावशाली बताते हुए योग दर्शन और वेद वाणी को अपने व्यवहार में अपनाने का आग्रह किया। योगगुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने उन्हें आशीर्वाद व शुभकामना स्वरूप मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योगाश्रम परिवार की ओर से अंगवस्त्र, श्रीफल और रुद्राक्षमाल भेंट किया। यज्ञ का संचालन वरिष्ठ साधक ललित वर्मा, डा अशोक गुप्ता मंजुगुप्ता और सुभाष वर्मा पूनम वर्मा दंपती ने किया। इससे पूर्व योगाचार्य आलोक श्रीवास्तव, ध्यान प्रमुख विजय सुखीजा, मुकेश शर्मा, मनोज, केशव वर्मा, रमन शर्मा व शिवम ने सामूहिक संध्या का अभ्यास कराया।







