जब धूम्रपान नहीं, फिर भी फेफड़ों का कैंसर क्यों?
आनुवंशिक परिवर्तन, प्रदूषण और पर्यावरणीय कारक बढ़ा रहे खतरा


शहरी चौपाल ब्यूरो
नई दिल्ली। आमतौर पर फेफड़ों के कैंसर को धूम्रपान से जोड़ा जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में ऐसे लोगों में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है जिन्होंने कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया। “नॉन स्मोकिंग लंग कैंसर” अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कैंसर अधिकतर तब सामने आता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।
बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली के थोरैसिक ऑन्कोलॉजी और लंग ट्रांसप्लांट विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. प्रमोज जिंदल ने बताया कि धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों का कैंसर कई कारणों से विकसित हो सकता है। इनमें EGFR और ALK जैसे जीन में परिवर्तन, रैडॉन गैस, वायु प्रदूषण, सेकंड हैंड स्मोक और परिवार में कैंसर का इतिहास प्रमुख हैं।
लंबे समय तक वायु प्रदूषण, खासतौर पर PM2.5 कणों के संपर्क में रहना, कैंसर का एक बड़ा कारण बन चुका है। इसके अलावा, पुरानी फेफड़ों की बीमारियाँ जैसे COPD या इंटरस्टिशियल लंग डिजीज भी जोखिम को बढ़ाती हैं।
लक्षण और पहचान में देरी
नॉन स्मोकिंग लंग कैंसर के लक्षणों में लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द, खून वाली खांसी, वजन घटना और थकान शामिल हैं। ये लक्षण आम बीमारियों जैसे सर्दी या ब्रोंकाइटिस से मिलते-जुलते हैं, इसलिए लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते।
डॉ. जिंदल के अनुसार, “चूंकि नॉन-स्मोकर्स के लिए कोई नियमित स्क्रीनिंग गाइडलाइन नहीं है, इसलिए अक्सर कैंसर देर से पहचाना जाता है।”
एडेनोकार्सिनोमा सबसे सामान्य प्रकार
धूम्रपान न करने वालों में एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma) फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम रूप है, जो फेफड़ों की बाहरी सतह पर विकसित होता है। यह आमतौर पर युवा और स्वस्थ व्यक्तियों में पाया जाता है जिनका धूम्रपान से कोई संबंध नहीं होता।
नए उपचार से उम्मीदें बढ़ीं
डॉ. जिंदल बताते हैं कि नॉन स्मोकिंग लंग कैंसर के बढ़ते मामलों ने उपचार में कई प्रगति को प्रेरित किया है।
टार्गेटेड थेरेपी: EGFR और ALK इनहिबिटर्स जैसी दवाएं विशिष्ट आनुवंशिक परिवर्तनों को निशाना बनाकर कैंसर कोशिकाओं को खत्म करती हैं।
इम्यूनोथेरेपी: यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर कैंसर से लड़ने में मदद करती है।
सर्जरी और रेडिएशन: प्रारंभिक चरण में ये उपचार अभी भी सबसे प्रभावी हैं।
कैसे बचें?
हालांकि धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे कम करने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं—
रैडॉन, एस्बेस्टस और हानिकारक रसायनों से दूरी बनाएं।
प्रदूषण और सेकंड हैंड स्मोक के प्रभाव से बचें।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं ।
विशेषज्ञों का संदेश
“फेफड़ों का कैंसर अब केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं रहा,” डॉ. जिंदल कहते हैं। “इससे बचाव के लिए जागरूक रहना, समय पर जांच कराना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। जागरूकता ही इस बीमारी के खिलाफ हमारी पहली रक्षा पंक्ति है।”
फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामलों ने एक नई चेतावनी दी है — स्वस्थ फेफड़े सिर्फ धूम्रपान न करने से नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा और सतर्क जीवनशैली से मिलते हैं।
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