संस्कार त्रिवेणी बन गई शरद पूर्णिमा हिंदुत्व सिखाता मत अनेक धर्म एक: स्वामी भारत भूषण


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए खालसा पंथ की स्थापना और राष्ट्रधर्म की रक्षा के लिए सर्वस्वदानी गुरु गोबिंद सिंह की पुण्यतिथि पर आपे गुरु आपे चेला का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अनुशासन को सर्वोपरि स्थान देने की मिसाल को अपनाते हुए आज शिष्यों को स्वावलंबन और अनुशासन के सामने सबके समान होने की सीख देते हुए आज गुरुदेव स्वामी भारत भूषण ने स्वयं दूर पीछे बैठकर अगली पीढ़ी के साधकों को स्वयं चंद्र नमस्कार योग सिखाने व यज्ञ संचालन विधि सीखने का अवसर देने का आनंद लिया। आज साधक ललित वर्मा ने यज्ञाचार्य व स. अमरजीत सिंह जसविंदर कौर दंपति ने यजमान की भूमिका निभाने का आनंद लिया। योग गुरु ने शिष्यों को समझाया कि हिंदुत्व हमें अनेक मत रू एक धर्म सिखाता है। हमारे धर्म पंथ हमें अनुयाई मात्र बने रहने के लिए नहीं धर्म को जीवन में अपनाते हुए धर्मनिष्ठ और सच्चे धार्मिक होते हुए धर्मप्रहरी बन रहने की प्रेरणा देते हैं, यही धर्मों रक्षति रक्षितरू की अवधारणा है। यहां शिष्य सिर्फ लाभार्थी नहीं अपितु धर्मपोषक होकर विद्या को आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए रक्षित करने में गुरु का सहयोगी और साझीदार बन जाता है। इस स्थिति में योगेश्वर कृष्ण जगद्गुरु होते हुए भी अर्जुन को सखा पुकारते हैं। इसी भाव की पुनरावृत्ति गुरु गोबिंद सिंह महाराज और उनके पंज प्यारों के रूप में हुई जिनमें गुरु गोबिंदसिंह ने स्वयं को सदा के लिए घोल दिया। आज रामायण महाकाव्य के रचयिता के रूप में रत्नाकर से विश्व के पहले कवि बने महर्षि बाल्मीकि और ध्यान की पराकाष्ठा महरास के आधार योगेश्वर कृष्ण गीता के श्लोकों का पाठ अनीता शर्मा, आलोक श्रीवास्तव, पूनम वर्मा, ललित वर्मा, मुकेश शर्मा, अमरनाथ, विशाल गुलाटी, सुमन्यु सेठ, केशव वर्मा सीमा गुप्ता, डा अशोक व मंजू गुप्ता आदि ने किया।







