मीरपुर के तीन मजदूरों की चिताएं साथ जलीं, गांव में पसरा मातम – तीन अब भी लापता


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर/छुटमलपुर। देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 15 सितंबर की रात बादल फटने से आई भीषण बाढ़ ने सहारनपुर जनपद के मीरपुर गांव सहित कई परिवारों को गहरे मातम में डुबो दिया। इस हादसे में मीरपुर के तीन मजदूरों श्यामलाल, मिथुन और विकास के शव बरामद हुए। शुक्रवार को जब इन तीनों की चिताएं एक साथ जलीं तो हर आंख नम हो उठी। गांव में कोहराम मचा रहा और कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
अंतिम यात्रा में उमड़ा पूरा गांव
अनुसूचित बस्ती के रहने वाले मजदूरों की अर्थियां जब गांव से निकलीं तो पूरा इलाका गमगीन माहौल में श्मशान घाट की ओर उमड़ पड़ा। ग्रामीणों को टूटे हुए रास्ते और भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। अंतिम संस्कार में भाजपा नेता साहब सिंह पुंडीर, प्रधान के पति सुशील उपाध्याय, सपा के विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष रागिब अली, अंकित वर्मा और भीम आर्मी के पदाधिकारी भी पहुंचे। ग्रामीणों ने सरकार से मृतकों और लापता मजदूरों के परिजनों को आर्थिक मदद की मांग की।
हादसे की पृष्ठभूमि
मीरपुर की अनुसूचित बस्ती के चार मजदूर सात सितंबर को देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में पत्थर तोड़ने का काम करने गए थे। 15 सितंबर की रात बादल फटने से आई बाढ़ में चारों लापता हो गए। बृहस्पतिवार को तीन मजदूरों के शव बरामद हो गए, जबकि धर्मेंद्र का अभी तक पता नहीं चल सका है।
पहचान में हुई गलती, घर में छाया और गहरा सन्नाटा
हादसे के बाद शुरूआती तौर पर शवों की शिनाख्त धर्मेंद्र, श्यामलाल और विकास के रूप में हुई थी। लेकिन पोस्टमार्टम के बाद पता चला कि तीसरा शव धर्मेंद्र का नहीं, बल्कि मिथुन का है। यह खबर मिलते ही मिथुन के घर में मातम पसर गया। उसकी पत्नी बेहोश होकर गिर पड़ी। मिथुन की पांच बेटियां हैं – सबसे बड़ी साक्षी 15 साल की और सबसे छोटी मात्र डेढ़ साल की है।
धर्मेंद्र की पहचान गलत साबित होने के बाद उसकी पत्नी और बच्चों के मन में अब भी उसके जीवित होने की आस बनी हुई है। परिवारजन देहरादून में डेरा डाले हुए हैं और खोजबीन जारी है।
अन्य गांवों के मजदूर भी लापता है इसी हादसे में गंदेवड़ा गांव का सचिन और खुजनावर माजरी गांव का सुरेंद्र भी अब तक लापता हैं। इनके परिजन भी देहरादून में तलाश में जुटे हुए हैं।







