मुजफ्फरनगर में फर्जी अस्पतालों का साम्राज्य
बिना पंजीकरण धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर, मरीजों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़


शहरी चौपाल ब्यूरो नितिन शर्मा
मुजफ्फरनगर, । जनपद मुजफ्फरनगर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बड़ी संख्या में फर्जी अस्पताल, मेडिकल स्टोर और अल्ट्रासाउंड सेंटर बिना अनुमति और पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं। मरीजों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
मिमलाना रोड, नियाजीपुरा, शहाबुद्दीनपुर रोड, सरवत रोड और बघरा क्षेत्र में ऐसे अवैध अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की भरमार है। यही नहीं, बुढ़ाना, जानसठ, चरथावल, खतौली, मीरापुर और पुरकाजी जैसे ग्रामीण इलाकों में भी झोलाछाप डॉक्टर इलाज और जांच का कारोबार चला रहे हैं। गरीब और मजदूर तबके के लोग मजबूरीवश इन ठिकानों पर इलाज कराने जाते हैं और अक्सर गंभीर परिणाम भुगतते हैं। कई मरीज अपनी जान तक गंवा चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी और लापरवाही से मौत का यह सौदा दिन-प्रतिदिन फल-फूल रहा है। कहीं छोटे-छोटे क्लिनिक खुले हैं तो कहीं बिना अनुमति अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाए जा रहे हैं। इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है, जबकि न तो यहां प्रशिक्षित चिकित्सक हैं और न ही कोई मानक सुविधाएं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जिलेभर में संचालित सभी अस्पतालों, मेडिकल स्टोरों और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की व्यापक जांच कराई जाए। बिना अनुमति चल रहे संस्थानों को तत्काल सील किया जाए और झोलाछाप डॉक्टरों व दोषी संचालकों पर कठोर कार्रवाई हो। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं पर स्थायी निगरानी तंत्र बनाया जाए और आम जनता की सुविधा के लिए शिकायत केंद्र व हेल्पलाइन शुरू की जाए।
बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक स्वास्थ्य विभाग आंख मूंदकर बैठेगा और कब तक गरीब-मजदूर तबका अपनी जिंदगी इन फर्जी अस्पतालों के हवाले करता रहेगा। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहा यह फर्जीवाड़ा अब मौत का कारोबार बन चुका है।







