महाशिवरात्रि पर मोक्षायतन में महामृत्युंजय यज्ञ, स्वामी भारत भूषण बोले— आत्ममंथन से ही बनते हैं दयानंद


शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर, । महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मोक्षायतन अंतर्राष्ट्रीय योग संस्थान में श्रद्धा और आस्था के साथ महामृत्युंजय यज्ञ एवं रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। अनुष्ठान के उपरांत आश्रम साधकों एवं नेशन बिल्डर्स एकेडमी के नन्हे भारतयोगियों से संवाद करते हुए पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि महाशिवरात्रि आत्मचिंतन और आत्ममंथन का महापर्व है।
उन्होंने कहा कि आस्था अंधानुकरण नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण चिंतन का मार्ग प्रशस्त करती है। महाशिवरात्रि पांच तत्वों की शक्ति को पहचानने, प्रत्येक व्यक्ति में निहित दिव्यता को जागृत करने और सर्वव्यापी, भेदभाव रहित वरदान देने वाले विराट शिव की उपासना की प्रेरणा देती है।
स्वामी भारत भूषण ने कहा कि शिव स्वयंभू होने से अनादि और अजन्मे हैं, दिगंबर होने से विराट, भोले होने से निष्पाप, समस्त सृष्टि का भरण-पोषण करने से भंडारी और विष को कंठ में धारण करने से गरलकंठ कहलाते हैं। उन्होंने समुद्र मंथन का उल्लेख करते हुए कहा कि गहन चिंतन और मंथन से ही अमृत सहित विश्व कल्याण के चौदह रत्न प्राप्त होते हैं।
उन्होंने कहा कि इसी आत्ममंथन का परिणाम था कि शिवरात्रि के दिन बालक मूलशंकर आगे चलकर महर्षि दयानंद सरस्वती बने। यदि शिवरात्रि न होती तो राष्ट्रधर्म के उद्धारक दयानंद भी न होते।
स्वामी ने हिंदुत्व और भारत राष्ट्र को महापुरुषों, पंथों व जातियों के नाम पर विभाजित करने को आध्यात्मिक अपराध बताया। उन्होंने कहा कि योगीराज भगवान शिव के नाम पर नशाखोरी और योगेश्वर भगवान कृष्ण के नाम पर भड़काऊ रासलीलाएं धर्म और अध्यात्म का अपमान हैं। शिव और कृष्ण को प्रसन्न करने का सच्चा मार्ग योग साधना और मन को संयमित करना है।
अनुष्ठान में आचार्य पंडित सुनील शर्मा, अधिष्ठाता एन.के. शर्मा, योगाचार्य आलोक श्रीवास्तव, योगाचार्य अनीता शर्मा, ललित वर्मा, विजय सुखीजा, मनोज, डॉ. अशोक, मंजू गुप्ता, दीपक मौर्य, प्रदीप कंबोज, शिवम, केशव वर्मा सहित अनेक साधक उपस्थित रहे।
अमेरिका से आई कनिका और आद्या की धार्मिक जिज्ञासा की सराहना करते हुए योग गुरु ने कहा कि नई पीढ़ी में बढ़ती आस्था देश और संस्कृति के लिए शुभ संकेत है।
राकेश जैन एवं ऋतु जैन के यजमानत्व में संपन्न रुद्राभिषेक के दौरान पुष्प जैन के बांसुरी वादन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।



















